

लेखक : रमेश जोशी
प्रधान सम्पादक, ‘विश्वा’, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, यू.एस.ए., सीकर (राजस्थान)
www.daylifenews.in
आज तोताराम ने आते ही आदेश दिया- ‘बोल- थैंक यू मोदी जी’ । वैसे ही जैसे आजकल के नए नए राम भक्त किसी भी मुसलमान को घेरकर कहते हैं- ‘बोल, जय श्री राम’।
हमने कहा- तोताराम, हम इतने मजबूर नहीं हैं कि 200 रुपए, नाश्ते का एक पैकेट और एक बीड़ी का बंडल/पाँच गुटके/ कोल्ड ड्रिंक लेकर किसी चुनावी रैली में जाएँ और ‘मोदी-मोदी’ चिल्लाएँ और न ही इतने डरपोक हैं कि किसी भी ऐरे-गैरे के कहने से किसी को धन्यवाद देने लगें। हाँ, किसी ने धन्यवाद के लायक कुछ किया हो तो हम इतने कृतघ्न भी नहीं हैं कि धन्यवाद न कहें। लेकिन मोदी जी ने हमारे लिए या देश के लिए कौनसा ऐसा काम किया है जिसके लिए ‘थैंक यू मोदी जी’ बोलें।
बोला- सीधे सीधे तेरे लिए नहीं किया तो क्या देश के किसी भी भाग के लिए कुछ भी अच्छा किया है तो धन्यवाद तो बनता ही है। तेरे लिए नहीं, राजस्थान के लिए नहीं तो केरल के लिए तो किया ही है ना । केरल का नाम केरलम् करने को मंजूरी दे तो दी।
हमने पूछा- पहली बात तो यह कि इस प्रकार नाम बदलने से क्या होता है। मूर्ख को मूर्खम् , दुष्ट को दुष्टम्, मूत्र को मूत्रम् करने से क्या उनका चरित्र या अवगुणों में कोई कमी आ जाएगी?
बोला- अगर मोदी जी को तेरे इस जुमले का पता चल जाए तो वे शीघ्र ही केरल में होने वाले चुनाव में इसे मुद्दा बना सकते हैं कि कुछ कांग्रेसी केरल को दुष्ट और मूर्ख बता रहे हैं । वैसे ही जैसे राष्ट्रपति के बंगाल में अपमान की आड़ में ध्रुवीकरण करने लगे ।
हमने कहा- लेकिन यह भूल गए कि खुद की पार्टी ने राम मंदिर शिलापूजन,राम लला की प्राणप्रतिष्ठा और संसद भवन के उद्घाटन में दलित और आदिवासी राष्ट्रपतियों को उपेक्षित किया था। लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे। और फिर केरल के लोग पढ़े लिखे और समझदार हैं। वे महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली वालों की तरह दो चार हजार में बिकने वाले नहीं है।
वैसे केरलं करने से कुछ होना हवाना नहीं फिर भी तुझे बता दें कि यह प्रस्ताव 2024 का है जिसे आज चुनाव से ठीक पहले स्वीकार करके एक घटिया केरल-प्रेम का प्रदर्शन किया जा रहा है। केरल का सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, बौद्धिकता, काम करने की शिद्दत पूरे देश के लिए अनुकरणीय है लेकिन उससे कोई कुछ सीखना नहीं चाहता।
खैर चल, आज तुझे इसी बात पर गिलासम् में चायम् पिलाएंगे।
बोला- वही सड़ियल चाय।
हमने कहा- तो बस, यह ‘थैंक यू मोदी जी’ भी वैसे ही है जैसे केरल का केरलं या पोर्टब्लेयर का श्री विजयपुरम हो जाना। अब भी श्री विजयपुरम अर्थात पोर्टब्लेयर से भेजी गई किताब उसी तरह 20 दिन में आती है जैसे 40-50 साल पहले आती थी। वे सोचते हैं श्रीविजयपुरम करने से तमिलनाडु के जागरूक नागरिक मूर्ख बन जाएंगे। वे काँवड़िए नहीं हैं।
और जहाँ तक केरल की बात है तो केरलं दो शब्दों से बना है केरा और आलम अर्थात नारियल की भूमि और दूसरा “चेर – स्थल”, ‘कीचड़’ और “अलम-प्रदेश” शब्दों के योग से चेरलम बना था, जो बाद में केरल बन गया। केरल शब्द का एक और अर्थ है : – वह भूभाग जो समुद्र से निकला हो। समुद्र और पर्वत के संगम स्थान को भी केरल कहा जाता है।
बोला- जब कीचड़ है तो कमल भी खिलकर ही रहेगा।
हमने कहा- हाँ, हाँ कमल खिलेगा लेकिन संप्रदायिकता, नस्ल, जाति, धर्म वाला कमल नहीं बल्कि इस कीचड़ से नितांत असंपकृत, अप्रभावित भारतीय माइ थोलॉजी का एक शानदार प्रतीक, एक अद्भुत मिथक- कमल। खिलेगा क्या ? सौभाग्य से आज भी खिला हुआ है और खिला रहेगा। यही तो हमारे संविधान की आत्मा है। सद्भाव। (लेखक के अपने विचार हैं)