श्री हनुमत कृपा दैवीय समस्या समाधान शिविर संपन्न

जाफ़र लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। वाराणसी ( काशी ) से आएं हुए जगद्गुरू श्री श्री 1008 श्रद्धेय स्वामी रूपेश्वरानंद महाराज , श्री पीतांबरा सिद्धपीठाचार्य द्वारा स्थानीय सुखीजा विहार, वैशाली नगर (पश्चिम), जयपुर राजस्थान में “श्री हनुमत कृपा दैवीय समस्या समाधान शिविर एवं सनातन संस्कार सम्मेलन” का भव्य आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
इस एक दिवसीय सनातन धर्म समागम में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुँचकर न केवल अपनी समस्याओं का आध्यात्मिक समाधान प्राप्त किया, बल्कि सनातन संस्कृति के मूलभूत शास्त्रॅक्त संस्कारों को भी आत्मसात किया।
श्री हनुमत कृपा समस्या समाधान शिविर:
शिविर के दौरान स्वामीजी ने भक्तों की आध्यात्मिक, व्यक्तिगत, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं को सुना। श्री हनुमान जी की भक्ति और पूजा पाठ के शास्त्रोक्त उपायों के माध्यम से लोगों को तनावमुक्ति और सकारात्मक जीवन जीने का मार्ग दिखाया गया।
सनातन संस्कार सम्मेलन:
इस सनातन धर्म सम्मेलन में ‘नई पीढ़ी के लिए शास्त्रीय मार्गदर्शन और सनातन संस्कार’ विषय पर चर्चा की गई। स्वामीजी ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी हमें अपनी जड़ों, यानी अपने संस्कारों से जुड़ा रहना क्यों आवश्यक है। बच्चों को तिलक लगाने, बड़ों का अभिवादन करने और दैनिक पूजा-पाठ के महत्व के बारे में शिक्षित किया गया। साथ ही सनातन धर्म के मूल संस्कारों एवं शास्त्र सम्मत आचरण पर जोर दिया एवं सनातन धर्म में विभिन्न संप्रदाय/ पंथ में अशास्त्रीय विधी से शव गाड़ने की परंपरा को अशास्त्रीय और सनातन धर्म परम्परा के विपरित बताया एवं शास्त्र प्रमाण के साथ सनातन धर्म के अनुरूप अग्नि दाह संस्कार को ही शास्त्रोक्त बताया।
मूल शास्त्रोक्त देवी देवता के पूजन पर जोर दिया एवं लोकदेवता के पूजन को अशास्त्रीय और अप्रासंगिक बताया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः काल सामूहिक पंच कुण्डिय एक दिवसीय श्री हनुमत यज्ञ, श्री बजरंग बाण पाठ का आयोजन किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण हनुमान जी की भक्ति के ओज से भर गया,।
शिविर में आध्यात्मिक परामर्श एवं पूजा पाठ की शास्त्रोक्त विधी का मार्गदर्शन करते हुए योग , यज्ञ , मंत्र जप के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य लाभ की जानकारी भी दी गई। शिविर में स्वामी जी ने यज्ञ , जप, दान और एकादशी व्रत का महत्व और विधान भी बताया। भोजन महाप्रसाद: कार्यक्रम के अंत में विशाल भोजन प्रसाद का आयोजन हुआ, जिसमें सभी भक्तों ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।
सम्मेलन का समापन विश्व शांति की के संकल्प और सामूहिक बजरंग बाण पाठ के साथ किया गया। इस आयोजन ने न केवल लोगों के मन को शांति प्रदान की, बल्कि समाज में शास्त्रोक्त सनातन धर्म के प्रति एक नई चेतना का संचार भी किया।

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