
युग निर्माण के नारों से गूंज उठी यज्ञशाला
जाफ़र लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। निकटवर्ती ग्राम मिश्रावास परिसर में महाराज नारायण दास श्री कृष्ण गौशाला संस्थान परिसर में 28 मार्च से अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के तत्वावधान में नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ पूर्णाहुतियों के साथ संपन्न हुआ। यज्ञ में 34 यजमान जोड़ो द्वारा नियमित एवं अन्य लोगों ने भी विभिन्न सत्रों के माध्यम से पूर्णाहुति के अवसर पर आहुतियां अर्पित कर स्वयं परिवार देश एवं विश्व के समग्र कल्याण की कामना की गई।
गायत्री मंत्र महामृत्युंजय आदि मंत्रोच्चार से यज्ञ शाला गूंजायमान थी। आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में यज्ञ के दर्शन किए। यज्ञ के दौरान शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक राधेश्याम गामी सहनायक रामेश्वर रावतिया या दौलत राम गामी गोवर्धन प्रोफेसर अजय भारद्वाज दिनेश पुरोहित द्वारा यज्ञ संपन्न करवाया गया।
यज्ञ के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालुओं की मौजूदगी में विभिन्न घरों से महिलाएं 5-5 दीपक लाकर दीप यज्ञ किया जाता था। यज्ञ समाप्ति पर भंडारा का आयोजन किया गया। इस दौरान शांति कुंज हरिद्वार से यज्ञ करवाने आए टोली के नायक राधेश्याम गामी ने दीक्षा संस्कार करवाते हुए श्री राम शर्मा आचार्य के जीवन परिचय देते हुए उनके कठोर अनुशासन जीवनकाल में 24-24 लाख के 24 महापुरश्चरण (कुल 57.6 करोड़ से अधिक) गायत्री मंत्र के जप किए थे।
उन्होंने तीन दशकों तक कठोर अनुशासन में रहकर इन मंत्रों का जाप किया, जो उनके अटूट गायत्री साधना समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने दीक्षा का अर्थ बताते हुए कहा कि दीक्षा लेने बाद अपनी इच्छाओ को युग ऋषि के चरणों में डाल कर उनके समर्पित होकर अपनी इच्छा जीना इससे हमारा जीवन सुगंधित हो जाता है।
इस दौरान प्रतिदिन गौ माता मंदिर ट्रस्ट आनंद नगर वृंदावन मथुरा के कथावाचक एवं गौ पुराण ग्रंथ के लेखक सन्यासी संत सुभाष महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि गाय सत्य है सात्विक के सनातन है इसलिए वह धर्म की जननी कही गई है धर्म गौ माता के अंदर निवास करती है। जिस धरती पर गाय खड़ी होती है वह धरती गौ माता की शरीर के माध्यम से पवित्रता और धर्म को अपने अंदर धारण करती है फिर उस धरती माता के अंदर पापों को शमन करने की शक्ति और जीवन को धारण करने की शक्ति उत्पन्न हो जाता है इसलिए गौ माता की विशेष महत्व है और हमारे धर्म शास्त्र में इसीलिए कहा गया यह धरती और धर्म गाय माता पर टिकी हुई है।
उन्होंने कहा कि गौ मूत्र पान से मनुष्य का शरीर क्षारीय हो जाता है। रोग प्रतिरोधक विभिन्न प्रकार के रोग मंदबिष नष्ट हो जाता है। और शरीर ओर बुद्धि पूर्णता सात्विक बन जाता हैं। इसके बाद में गायत्री महा आरती के साथ यज्ञ संपन्न हुआ। यज्ञ के लिए जयपुर स्थित गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओंको का मंडल नियमित रूप से मौजूद रहा। यज्ञ समाप्ति के बाद यजमान जोड़ो के रिश्तेदारों ने गौशाला में आकर यज्ञ और गायों की पूजा अर्चना कर दान देकर को संरक्षण के लिए हाथ उठाए। यजमान जोड़ों के द्वारा करीब 200 क्विंटल चारा, अच्छा दलिया आदि लोगों ने भेंट किया। यज्ञ समाप्ति के बाद कलाकारों के द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। पूर्णाहुति के बाद भंडारा का आयोजन किया गया जिसमें लोगों ने पंगत प्रसादी ली।
गौ रक्षक दल भी रहा मौजूद-
खोजावाला के गौरक्षक लोकेश गुर्जर टीम के द्वारा यज्ञ के दौरान लगातार दिन- रात यज्ञ समिति के साथ गायों की आवास व्यवस्था को सुधारने के लिए कार्य करते रहे।
यज्ञ समिति के सदस्य खेमचंद यादव रामनारायण यादव गौशाला के अध्यक्ष से जगदीश प्रसाद सोनी सचिव गुल्लाराम बाड़ीगर भागीरथ प्रसाद,तेजपाल जाट,गोपाल टोकस, ओमप्रकाश यादव, रिछपाल यादव,धौलुराम यादव,प्रहलाद सहाय यादव,ग्यारसीलाल यादव, रामचंद्र बुनकर,शिवदान गुर्जर,राजेश बोदूराम मनोज सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।