श्री अरविंदो का चिंतन जीवन के समग्र विकास का व्यावहारिक दर्शन है : डॉ. परीक्षित सिंह

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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत डॉ. परीक्षित सिंह के सत्र में पुस्तक “द एज ऑफ़ श्री अरविंदो” पुस्तक का विमोचन हुआ ।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत आज क्लार्क अम्बर के सूर्या महल हॉल में आयोजित सत्र “द एज ऑफ़ श्री अरविंदो” अत्यंत सफल एवं विचारोत्तेजक रहा। भारत मूल के अमेरिका के निवासी डॉ. परीक्षित सिंह के इस विशेष सत्र में उनकी नवीन पुस्तक “द एज ऑफ़ श्री अरविंदो” का विमोचन किया गया। सत्र का संचालन संवाद शैली में हुआ, जिसमें नमिता दाविदयाल और शौनक ऋषि दास ने डॉ. सिंह से गहन विमर्श किया।
खचाखच भरे सभागार में इस सत्र का केंद्रीय विषय श्री अरविंदो का दर्शन रहा, जिसमें डॉ. परीक्षित सिंह ने उनके दर्शन के पाँच प्रमुख सूत्रों/मोटिफ़्स (SMS – प्रमुख जीवन पक्ष) को विस्तार से प्रस्तुत किया। चर्चा में यह रेखांकित किया गया कि अरविंदो का चिंतन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि जीवन के समग्र विकास व्यक्ति, समाज और राष्ट्रकृके लिए एक व्यावहारिक दर्शन है।
डॉ. सिंह ने भातीय दर्शन के संदर्भ में वेदों पर अरविंदो के विचार, आधुनिक समाज की चुनौतियाँ, श्रीकृष्ण के कर्मयोग एवं चेतना-दर्शन, तथा भारत के भविष्य के लिए अरविंदो की दृष्टि पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही, आज के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में नोबेल पुरस्कार विजेताओं (नोबेल लॉरिएट्स) द्वारा श्री अरविंदो के दर्शन पर व्यक्त विचारों का भी उल्लेख किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनका चिंतन आज भी विश्व स्तर पर प्रासंगिक और प्रेरक है।
इस अवसर पर प्रख्यात भारतीय राजनेता, दार्शनिक एवं जम्मू-कश्मीर रियासत के टाइटुलर महाराजा, पद्म विभूषण डॉ. करण सिंह, विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने सत्र की विषय वस्तु से प्रभावित होकर अपने दार्शनिक विचार साझा किए और अरविंदो के समग्र मानवतावादी दृष्टिकोण को भारत की बौद्धिक परंपरा की एक ऊँचाई बताया।
सत्र के दौरान प्रो. मकरंद परांजपे ने भी प्रश्न पूछे तथा अपने विचार रखे, जिससे विमर्श और अधिक समृद्ध हुआ। उनके प्रश्नों और टिप्पणियों ने अरविंदो के दर्शन की साहित्यिक, दार्शनिक और समकालीन प्रासंगिकता को नई दृष्टि प्रदान की। समग्र रूप से, “द एज ऑफ़ श्री अरविंदो” सत्र न केवल एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम रहा, बल्कि भारतीय दर्शन, आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक विश्व की चुनौतियों के बीच एक सार्थक संवाद का सशक्त मंच सिद्ध हुआ। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का यह सत्र बौद्धिक जगत में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।

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