
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़, (राजस्थान)
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वर्तमान समय में बच्चे मोबाइल ऑन स्क्रीन अपना टाइम निकालते हैं। लेकिन अगर शुरुआत से ही बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार छोटे-छोटे घरेलू काम की जिम्मेदारी सौंप दी जाएं तो मोबाइल छोड़ कर वह उन कामों में खुशी महसूस करेंगे। समय-समय पर उनका उत्साहवर्धन करते रहे। जब बड़े होते जाएंगे उस कार्य में निपुण हो जाएंगे। उनकी रुचि के अनुसार छोटे-छोटे काम बताए और सिखाएं।
कोई सा भी काम हो बच्चे बचपन से ही सीखते हैं जैसे उनके अभिभावक करते हैं। वह उनको देख देख कर ही सब कुछ सीखते हैं। माता-पिता खुद स्वयं सामान को सहेज के रखें और व्यवस्थित रखें तो बच्चे भी वैसा ही करेंगे। शुरुआत में बच्चों को अपने पढ़ने की टेबल को व्यवस्थित करना सिखाए। इसकी साफ सफाई सिखाएं। कॉपी, पेंसिल, इरेज़र वगैरह सब ठीक से रखें। फिर कोई छोटा सा घर का कोना जो उसकी उम्र के अनुसार हो उसको जिम्मेदारी दे कि इस सामान को व्यवस्थित रूप से जमाना है। सुबह उठते ही अपनी चादर खुद समेटने के लिए कहें। बिस्तर को ठीक करने के लिए कहें। बाथरूम में नहाने के पश्चात साबुन को गीले में न रखे। बाथरूम का सभी सामान बाल्टी, जग, पटिया सभी को सहेज कर रखे।
चाय नाश्ता करने के बाद डाइनिंग टेबल को साफ करें। स्कूल से आने के बाद बैग को अपनी टेबल पर ही रखना है। थोड़ी थोड़ी डस्टिंग भी सिखाए। पूरा घर एक साथ नहीं करे, घर में कोई भी कोना, जगह बता कर उसे सामान सहेज कर रखना सिखाए। लड़का हो या लड़की बड़े होकर बच्चों को बाहर जाकर पढ़ना होता है तो उसे छोटे छोटे रसोई के काम भी बताए। हॉस्टल में रहना पड़ता है। कभी हॉस्टल का केंटीन बंद हो। खाने का मैस बंद हो तो चाय नाश्ता थोड़ा बहुत बना सके ताकि भुखा न रहना पड़े। घर में कोई बीमार पड़ जाए तो घर में भी कुछ बनाकर दे सके। ग्रहणी भी कभी आराम करना चाहे, स्वास्थ्य ठीक नहीं हो तो दूसरों पर आश्रित न रहना पड़े। रसोई को भी साफ करना सिखाए। जब बचपन से ही यह सब काम करने की आदत पड़ जाएगी तो वह बड़ा होकर खुद अपनी जिम्मेदारी समझेगा। अपनी सभी चीजों को सहेज कर रखेगा और घर को भी व्यवस्थित रखेगा। (लेखिका के अपने विचार है)