आयुष भवन में हकीम अजमल खान को दी श्रद्धांजलि

विश्व यूनानी दिवस पर यूनानी चिकित्सा के प्रचार-प्रसार पर दिया गया जोर
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जयपुर। आयुष भवन स्थित यूनानी निदेशालय में विश्व यूनानी दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महान यूनानी चिकित्सक हकीम मोहम्मद अजमल खान की जयंती पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
हकीम मोहम्मद अजमल खान न केवल एक महान चिकित्सक, माहिर तबीब एवं हाज़िक हकीम थे, बल्कि वे एक सच्चे देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वे महात्मा गांधी के निकट सहयोगी रहे तथा एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में समाज में एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने हिंदू महासभा की बैठक की अध्यक्षता की, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्थापक सदस्य रहे तथा इसके कुलपति भी रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने करोलबाग, दिल्ली स्थित आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बिया कॉलेज की स्थापना की।
हकीम साहब गरीबों का निःशुल्क इलाज करते थे तथा अमीरों से उनकी हैसियत के अनुसार शुल्क लेते थे। मानव सेवा एवं चिकित्सा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें “मसीह-उल-मुल्क” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में निदेशालय के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। जयपुर एवं आसपास के जिलों से आए यूनानी चिकित्सा अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम की शुरुआत हकीम अजमल खान की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
इस अवसर पर डॉ. मनमोहन खींची (अतिरिक्त निदेशक), डॉ. हनुमान प्रसाद (उप निदेशक), डॉ. देवेंद्र राजोरा (सहायक निदेशक), डॉ. शौकत अली (अतिरिक्त निदेशक), डॉ. हरनाथ सिंह गोरा (सहायक निदेशक) सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में डॉ. शौकत अली एवं डॉ. मोहम्मद अकरम ने हकीम अजमल खान के जीवन, उनकी सेवाओं तथा यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने उन्हें मानवता और चिकित्सा सेवा का प्रतीक बताया।
इस दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हाथ उठाकर शपथ ली कि वे हकीम अजमल खान द्वारा बताए गए सेवा, समर्पण एवं मानवता के मार्ग पर चलते हुए समाज एवं राष्ट्र की सेवा करते रहेंगे।
वक्ताओं ने यूनानी चिकित्सा पद्धति को जनकल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसके प्रचार-प्रसार एवं जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन यूनानी चिकित्सा के भविष्य को सशक्त बनाने एवं इसे आमजन तक पहुँचाने के संकल्प के साथ किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. हरनाथ सिंह गोरा, सहायक निदेशक द्वारा किया गया।

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