आपकी सीमा क्या है?

लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
www.daylifenews.in
जेफरी एप्पस्टीन फाइल में छिपे काले कारनामों की वजह से अमेरिका के दबाव में आकर अगर आप इजराइल नहीं जाते तो आज देश के यह हालत नहीं होते। आप देख रहे हैं जनता सड़क पर है। पेट्रोल पंप पर लाइन लगी है। सिलेंडर के लिए मारामारी हो रही है। कच्चा माल महंगा होने से गुजरात में प्लास्टिक के कारखाने बंद हो रहे हैं। लोग बेरोजगार हो गए हैं। लेकिन अभी भी अगर आप जरा सा गौर फरमाए तो पता चलेगा पूरा विश्व और देश की जनता आपको कैसे याद कर रही है।
लंबे समय से जब युद्ध के आसार चल रहे थे तो गैस और तेल का पर्याप्त भंडारण क्यों नहीं किया गया। युद्ध शुरू होने के मात्र 3 हफ्तों में ही देश के हालात कैसे हो गए हैं। लेकिन आपकी सरकार पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि आपके नेताओं के लिए गैस सिलेंडर, पेट्रोल की कमी नहीं होगी। देश के कर्णधारों को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
डॉ मनमोहन सिंह ने उस वक्त कहा था कि अगर मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो यह देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा। उस वक्त ये बात बुरी लगी। 70 साल पहले नेहरू ने कहा था कि इस देश को संभाल लेना आने वाले 70 साल में एक प्रधानमंत्री ऐसा होगा जो इस देश को बेच खायेगा। आज ये बातें अक्षरशः सही साबित हो रही है।
मोदी जी ने 12 साल में कोई प्रेस कांफ्रेंस आयोजित नहीं की। विदेशो में घुमने फिरने से फुर्सत मिले तो दूसरे काम , जनता कि परेशानी समझ में आए। लेकिन मात्र दो दिन में लोकसभा और राज्यसभा में आकर भाषण दिया कि इस युद्ध के कारण विश्व में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है लेकिन ये नहीं बताया कि ये संकट उन्हीं की मेहरबानी से पैदा हुआ है। मोदी जी कह रहे हैं कि यह एनर्जिक क्राइसिस आफ इंडिया है इसका कोरोना कोविड काल की तरह ही एकजुट होकर मुकाबला करना होगा। उनके कारनामों की सज़ा जनता भुगते और सरकार का साथ दे। लेकिन कोरोना काल में भी मोदी सरकार ने 50 लाख मौतें की बजाय 5 लाख का सरकारी आंकडा दिखाया। वो प्राकृतिक आपदा थी। यह सरकारी आपदा है जो सब कुछ जानते हुए भी इजरायल यात्रा का परिणाम है।
सबसे मुख्य बात कोरोना काल एक अलग व्यवस्था थी। लोग घरों में थे, सब फ्री थे, हाउस वाइफ हो या कामकाजी महिलाएं, बच्चों के विद्यालय की, आफिस की कोई जल्दी नहीं होती थी। परिवार वालों ने नए-नए व्यंजन बनाकर, पकवान बनाकर, महिलाओं ने नई रेसिपी सीख कर, बना कर, खिला कर उस कठिन वक्त को गुजार लिया पर माननीय मोदी जी ये बताएं कि इस ऊर्जा संकट में देश की जनता खाना कैसे बनाएंगी या फिर भुखे रह कर पानी पीकर समय निकालना है?
अगली योजना क्या है गैस सिलेंडर के अलावा दूसरे ईंधन लकड़ी, कोयला भंडारण, गोबर के कंडे की समुचित व्यवस्था की जा रही है? गैस आपूर्ति नहीं होने पर बिजली से चलने वाले, इंडक्शन चूल्हे की मांग ज्यादा होगी तो क्या बाहर से आयातित इन उपकरणों की आपूर्ति निर्बाध जारी रहेगी? अगर सरकार अभी भी नहीं संभली तो देश का क्या होगा? यह सवाल हर भारतीय नागरिक के लिए चिंता का विषय है? (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *