तमिलनाडु में चुनावों से पूर्व महिलाओं की बल्ले बल्ले

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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यह कहना गलत नहीं होगा कि देश में बीजेपी ने सबसे पहले महिला शक्ति को पहचाना और ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा जिससे महिलायों का सशक्तिकरण होता हो . मोटे तौर पर देश में महिलायों की आबादी पुरूषों के बराबर है। बिहार सहित देश के कुछ राज्यों में महिलायों की संख्या पुरूषों से अधिक है। यह श्रेय बीजेपी को ही जाता है जिसने सवैधानिक रूप से महिलायों को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया। इसका पूरा लाभ बीजेपी को चुनावों से में मिला। इसके देखा देखी अन्य दलों ने इस नीति का अनुसरण करना शुरू किया। हालाँकि इन सबके पीछे राजनीतिक लाभ लेना ही था
सबसे पहले मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले विधानसभा चुनावों से पूर्व बेटी महिला योजना के अंतर्गत सम्मान राशि देने की घोषणा की। इसका भरपूर लाभ बीजेपी को मिला तथा बीजेपी फिर सत्ता में आने में सफल रही। फिर इसी तरह की नीति महाराष्ट्र और बिहार में भी अपनाई गई। ऐसा माना जाता है कि बीजेपी को इन दोनों राज्यों में फिर सत्ता में आने में इन महिलायों को दी गई सम्मान अथवा कल्याण राशि ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल द्रमुक ने लोकसभा चुनावों से पूर्व इसी तरह की एक योजना के जरिये महिलायों को हर महीने 1000 रूपये सम्मान राशि देना शुरू किया. इसका लाभ द्रमुक को हुआ तथा लोकसभा चुनावों में इस पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर अधिकांश सीटें जीतने में सफलता पाई। इस योजना से लाभान्वित होने वाली महिलायों के संख्या लगभग है 1.31 करोड़ है।
राज्य में विधानसभा चुनाव जल्दी होने वाले है। चुनावों की घोषणा कभी भी हो सकती है। इसको मद्दे नज़र रखते हुए राज्य के मुख्यमत्री तथा द्रमुक के मुखिया एम् .के स्टालिन ने इस योजना की लाभार्थी महिलायों को मार्च और अप्रैल की राशि अग्रिम रूप से देने का फैसला किया। लेकिन गत 13 फरवरी को, जब लोग सुबह की चाय पी रहे थे, हर महिला के खाते में 5000 रूपये आने की सूचना उनको मोबाइल के जरिये मिली। महिलायों को इतनी बड़ी राशि एक मुश्त पाने पर बड़ा आश्चर्य हुआ। वे उम्मीद कर रहीं थी कि इस बार फरवरी, मार्च तथा अप्रैल की राशि, जो 3000 रूपये होती है, आयेगी। एक दिन पूर्व ही स्टालिन ने इसकी विधिवत घोषणा भी की थी। पांच हज़ार रुपये की राशि खाते में आने के कुछ समय बाद स्टालिन की एक विडिओ क्लिप भी सामने आई . इसमें उन्होंने कहा कि तीन महीने की राशि के अतिरिक्त 2000 रूपये की राशि गर्मी के मौसम से निपटने के लिए जोड़ी गई हैं . स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार का ध्यान महिलायों के कल्याण पर केन्द्रित है इसलिए उनकी सरकार हर ऐसा कदम उठाने के लिए तैयार है जिससे महिला सशक्तिकरण होता हो।
अब तक सामान्य तौर पर 1000 रूपये की राशि महीने के मध्य यानि 15 तारीख को आती रही है . लेकिन इस बार 5000 रुपए उनके खाते में 13 फ़रवरी को ही ट्रान्सफर कर दिये गए।
स्टालिन ने खुद कहा कि समय से पूर्व तथा 5000 रूपये एक मुश्त जमा करवाये जाने के कुछ कारण थे . एक बड़ा कारण यह था कि चुनाव आयोग निकट भविष्य में कभी भी राज्य विधान सभा चुनावों की अधिसूचना जारी कर सकता है . इसके साथ ही राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो जायेगी . इसके चलते इस प्रकार की नई योजनायों को लागू नहीं किया जा सकेगा।
पर इसका बड़ा कारण कुछ और ही था। स्टालिन का कहना है कि राज्य तथा दिल्ली के कुछ संगठन ने ऐसी लाभार्थी योजनायों पर रोक लगाये जाने की याचिकाएँ मद्रास हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने इस संबंध में किसी एक संस्था अथवा संस्थायों का नाम नहीं लिया. ऐसा माना है कि राज्य के कुछ विपक्षी दल ऐसी योजनायों पर रोक लगाने को चुनौती देने की तैयारी में जुटे थे . स्टालिन और उनकी पार्टी के कुछ अन्य नेताओं को इसकी भनक लग गई थी . पार्टी नेताओं को आशंका थी कि मद्रास हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट ऐसी जन हित याचिकायें मंजूर कर ऐसी सभी योजनायों पर रोक लगा सकता है सरकारी तौर पर बताया गया कि इस योजना पर कुल मिलकर 65,50 करोड़ रूपये खर्च होगा . केवल इतना ही नहीं बल्कि स्टालिन ने यह घोषणा भी की कि अगर उनकी पार्टी फिर सत्ता में आई तो महिलायों को हर मह=महीने दी जा रही 1000 रूपये की राशि बढ़ा कर 2000 रूपये कर दी जाएगी। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)

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