तमिलनाडु में चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होगा

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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पिछले कई दशकों से दक्षिण में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु में आम तौर पर चुनाव दो गठबन्धनों के बीच होते रहे है . इन दो ध्रुवीय चुनावों में एक तरफ वर्त्तमान में सत्तारूढ़ दल द्रमुक तथा प्रमुख विपक्षी दल अन्नाद्रमुक का गठबंधन के बीच मुकाबला होता था . एक आध अपवाद को छोड़ दोनों गठबंधन हर पांच साल बाद सत्ता में आते रहे है .लेकिन इस बार केवल दो वर्ष पूर्व बने नए दल टी वी के. के मैदान में आ जाने से विधान सभा त्रिकोणीय हो गए हैं . राज्य की राजनीति में यहाँ के फिल्म उद्योग का दबदबा रहा है . इन दोनों गठबन्धनों के नेताओं का किसी ने किसी तरह फिल्म उद्योग से संबध रहा है . नया दल बनाने वाले फिल्म अभिनेता विजय इस समय राज्य में फिल्मों में एक बड़ा नाम है . उन्होंने पिछले सालों में कई हिट फ़िल्में दी है . उनका दल तमिल संस्कृति तथा तमिल अस्मिता के नारे को लेकर सामने आया है . इस दल ने विधानसभा की सभी 234 सीटों में उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा की है .पिछले एक साल में उन्होंने कई बड़ी सभाएं की . एक सभा में तो इतनी भीड़ आई की भगदड़ मच गई जिसमें 40 से अधिक लोग मारे गए थे . विजय , जिनका पूरा नाम विजय जोसफ है , शुरू से कहा दिया था कि न तो वे किसी गठबंधन में शामिल होंगे और ने ही उनकी नीतियों पर चलेंगे।
अभिनेता के रूप में उनको चाहने वालों के संख्या लाखों में है . राज्य की फ़िल्मी परम्परा के अनुसार हर बड़े अभिनेता ने उसको चाहने वालों के फैन क्लब बना रखे है . विजय के चाहने वालों के फैन क्लब बड़ी संख्या में है . अब ये फैन क्लब उनके चुनावी कार्यालय बन गए है तथा उनको चाहने वाले ही चुनाव अभियान चला रहें हैं।
उधर सत्तारूढ़ दल द्रमुक के सुप्रीमो तथा राज्य के मुख्यमंत्री एम् क. स्टालिन को पूरा भरोसा है की उनकी पार्टी फिर सत्ता में लौटेगी . राष्ट्रीय स्तर पर द्रमुक इंडिया गठबंधन का हिस्सा है . लेकिन राज्य में इस पार्टी का अपना गठबंधन सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायन्स बना रखा है . इसमें कांग्रेस के अलावा लगभग डेढ़ दर्जन दल है . पार्टी का दावा है है कि अलायन्स में सीटों का बंटवारा चुनावों की घोषणा से बहुत पहले ही गया था . हालाँकि कांग्रेस के साथ सीटों की बाँट को लेकर लम्बी खींचतान चली . कांग्रेस कम से कम 40 सीटें मांग रही थी. लेकिन द्रमुक इतनी सीटें देने को तैयार नहीं थी . पिछले दो दशको से कांग्रेस पार्टी द्रमुक के साथ ही मिलकर लोकसभा तथा विधान सभा लड़ती आ रही है . 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 25 सीटें मिली थी और उसमे से 18 सीटें जीती थी . द्रमुक को 133 सीटों पर विजय मिली थी .इस बार कांग्रेस को 28 सीटें मिली हैं। द्रमुक के यह नीति रही है कि वह उनके गठबंधन की सरकार के बनने पर किसी भी सहयोगी दल को सरकार में हिस्सेदारी नहीं नहीं देती . इसलिए वह सदा अपने पास अधिक से अधिक सीटें रखती है ताकि वह इतनी सीटें जीत सके जिसके वह आपने बलबूते पर सरकार बना सके . 2006 में ऐसा पहली बार हुआ था कि द्रमुक को अपने बल पर बहुमत नहीं मिला तथा सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी . लेकिन यह समर्थन बाहरी था तथा किसी भी सहयोगी दल के सदस्य को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।
उधर अन्नाद्रमुक और बीजेपी में सीटों को बंटवारा मोटे तौर पर बहुत पहले हो गया था। बीजेपी को कुल मिलकर58 मिली। हालाँकि इस बटवारे में आखिरी समय कुछ बदलाव हो सकता है . द्रमुक की तरह अन्नाद्रमुक के भी यह नीति रही है कि वह अपने किसी सहयोगी दल को सरकार में हिस्सेदारी नहीं देती. लेकिन अब पहली बार ऐसा हुआ कि अन्नाद्रमुक इस बात पर सहमत हो गई है कि अगर उसका गठबंधन सत्ता में आया तो उसमें कम से कम तीन मंत्री पद बीजेपी को दिए जायेंगे। इस गठबन्धन के नेताओं का कहना है कि राज्य में द्रमुक विरोधी लहर है, सरकार ने वोट पाने के लिए मुफ्त रेवड़ियों का एक बड़ा पिटारा खोल दिया था, इसके बावजूद द्रमुक सत्ता में नहीं आ सकती . राज्य में सत्ता बदलाव की हवा चल रही है तथा अन्नाद्रमुक नीत गठबंधन को सत्ता में आने से रोका नहीं जा सकता। बीजेपी ने पिछला चुनाव भी अन्नाद्रमुक के साथ मिल कर लड़ा था। पार्टी को राज्य में पहली बार 4 सीटें मिली थी। इस बार पार्टी को कुछ अधिक सीटें मिलने की उम्मीद है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का आंकलन है कि विजय की पार्टी टी.वी.के. के मैदान आने से सभी राजनीतिक समीकरण बदल सकते है। (लेखक के अपने विचार हैं)

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