छोड़ो बेवजह की बातें

कविता

लेखिका : ममता सिंह राठौर
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वक्त के साथ रास्ते बदल जाते हैं
कुछ छोटे ,कुछ कच्चे पक्के निकल आते हैं

जिंदगी है भैया क्यों बवाल मचाना
सीढ़ियां चढ़ के थोड़ी ऊपर जाना है
अरे भैया यहीं मिले यही खो जाना है
दो मीठे बोल पर सारा जमाना है
फिर किस बात पे मचमच मचाना है

चलो छोड़ो बेवजह की बातें
एक वजह ढूंढ लाना है

तुम्हारा हमसे हमारा तुमसे क्या रिश्ता पुराना है
अरे यहीं मिले यही तक निभाना है
कुछ गलतियां हमारी कुछ शिकायतें तुम्हारी
चलो इन दोनों का मेल कराना है
यही मिले यही तक निभाना है

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