कला-सेतु ने जगाईं बचपन की गर्मियों की यादें

कलानेरी आर्ट गैलरी में भावनाओं और संवादों से भरी रही अनूठी संध्या
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जयपुर। कलानेरी आर्ट गैलरी एंड अकैडमी ऑफ फाइन आर्ट्स द्वारा संचालित सामुदायिक पहल कला-सेतु के अंतर्गत आयोजित विशेष कार्यक्रम “गर्मी की छुट्टियाँ याद हैं?” ने प्रतिभागियों को बचपन की यादों, रिश्तों और साझा अनुभवों से दोबारा जोड़ दिया। यह संध्या केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्मृतियों, संवादों और भावनाओं का ऐसा अनुभव बन गई जिसने उपस्थित सभी लोगों को भीतर तक छू लिया।
पूरे आयोजन को इस तरह से डिज़ाइन किया गया था कि प्रतिभागी अपने बचपन की गर्मियों को महसूस कर सकें। प्रवेश करते ही लोगों का स्वागत पुराने समय की याद दिलाने वाले सावधानीपूर्वक सजाए गए फोटो-बूथ ने किया, जिसमें पुराने टेलीफोन, अलार्म घड़ी, रेडियो, कैसेट, सीडी, बच्चों की साइकिल, पुराने पत्र और लिफाफे जैसी वस्तुएँ शामिल थीं। वातावरण में मिट्टी की सौंधी खुशबू घुली हुई थी, जिसने लोगों को तुरंत अपने बीते दिनों की दुनिया में पहुँचा दिया।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण बचपन के स्वादों को समर्पित कोना रहा, जहाँ कच्चा आम, इमली, पारले-जी, आम पापड़, पॉपिन्स, ऑरेंज टॉफियाँ, लॉलीपॉप और अन्य अनेक परिचित स्वादों ने लोगों की स्मृतियों को ताज़ा कर दिया।
संध्या के दौरान प्रतिभागियों ने पुराने टेलीविज़न कार्यक्रमों और कार्टूनों के जिंगल पहचानने की गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुराने विज्ञापनों की झलकियों को देखकर उत्पाद पहचानने वाले खेल ने भी सभी को वर्षों पीछे पहुँचा दिया। इसके बाद लोगों ने अपने बचपन, परिवार, दादा-दादी, नाना-नानी और गर्मियों की छुट्टियों से जुड़ी कहानियाँ साझा कीं। अनेक प्रतिभागियों ने बताया कि वर्षों बाद उन्हें इतने लोगों के साथ बैठकर अपनी यादों को साझा करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा जब प्रतिभागियों को एक पुराने टेलीफोन के माध्यम से किसी प्रिय व्यक्ति के लिए संदेश छोड़ने के लिए आमंत्रित किया गया। इस गतिविधि ने कई लोगों को उन रिश्तों और लोगों की याद दिलाई जो उनके जीवन में महत्वपूर्ण रहे हैं। कई संदेशों में प्रेम, कृतज्ञता और स्मृतियों की गहराई झलकती दिखाई दी।
प्रतिभागियों को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए विंटेज शैली के प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जिनमें पुराने पोस्टकार्ड, रेडियो और टेलीविज़न की झलक दिखाई देती थी। कार्यक्रम के अंत तक यह स्पष्ट था कि लोग केवल एक आयोजन में शामिल होकर नहीं जा रहे थे, बल्कि एक अनुभव अपने साथ लेकर जा रहे थे।
कलानी के संस्थापक वे डायरेक्टर सौम्या विजय शर्मा ने बताया की कला-सेतु की स्थापना इस विश्वास के साथ की गई है कि आज के समय में लोगों को केवल कार्यक्रमों की नहीं, बल्कि सार्थक समुदायों की आवश्यकता है—ऐसी जगहों की, जहाँ वे जुड़ सकें, अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें।
इस आयोजन की सफलता ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि लोग ऐसे अनुभवों की तलाश में हैं जो उन्हें केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी प्रदान करें। प्रतिभागियों ने कला -सेतू की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में ऐसे और आयोजनों की इच्छा व्यक्त की।
अब तक आयोजित तीन परिचयात्मक आयोजनों के बाद कला-सेतु अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। आने वाले समय में समुदाय के मासिक आयोजन एक अधिक संरचित और टिकाऊ स्वरूप में आयोजित किए जाएंगे, ताकि प्रतिभागियों को नियमित, सार्थक और विविध अनुभव प्रदान किए जा सकें।
कला-सेतु सभी आयु वर्गों, पृष्ठभूमियों और रुचियों के लोगों का स्वागत करता है। कला, संस्कृति, लेखन, संगीत, फोटोग्राफी, कहानी-कथन, यात्रा, संवाद और रचनात्मक अभिव्यक्ति में रुचि रखने वाले लोग इस समुदाय का हिस्सा बन सकते हैं।
कनेक्ट. सेलिब्रेट. कॉन्ट्रिब्यूट.
इन्हीं तीन मूल्यों के साथ कला-सेतु जयपुर में एक जीवंत, समावेशी और रचनात्मक समुदाय के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वास्ते प्रकाश नार्थ

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