धोए कान : हुए स्नान

लेखक : रमेश जोशी
प्रधान सम्पादक, ‘विश्वा’, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, यू.एस.ए.
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कल पानी नहीं आया। 20 मिनट मोटर व्यर्थ ही चली जैसे किसान आंदोलन में 700 अच्छे भले किसान अच्छे दिनों की बलि चढ़ गए। न मोदी जी ने मिलने योग्य समझा और न ही संसद ने श्रद्धांजलि देने लायक। फोन किया तो जलदाय विभाग वालों ने उत्तर दिया- हमने तो खोल दिया। एक बार फिर मोटर चलाकर देख लें। अब सरकारी उपलब्धियां है जितनी मर्जी हों उतनी पहुँचें । पहुँचें और न पहुँचे तो भी क्या कर लोगे। 10 मिनट और मोटर चलाई तो बमुश्किल कोई पाँच बाल्टी पानी आया। टैंकर वाले को फोन कर दिया कि कल सुबह सबसे पहले हमारा नंबर लगा देना। बस, उसीका इंतजार कर रहे थे कि तोताराम हाजिर।
बोला- ऐसे कैसे मोदी जी तरह बैठा है कि ट्रम्प परमीशन दें तो रूस से तेल खरीदे।
हमने कहा- हमारी कोई एप्सटीन फ़ाइल किसी के पास नहीं है या किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि एक दिन में हमारा कैरियर में खराब कर दें। हम नेहरू जी के जमाने के अपॉइन्टी हैं। भले ही उन्होंने हमें मोदी जी की तरह नियुक्ति पत्र नहीं दिया हो ।रात को भी दो लोटे पानी नहीं डाला सो सोचते हैं कि टैंकर वाला आ जाए तो फ्रेश होकर ही चाय पियें।
बोला- मोदी जी ने मितव्ययिता के लिए कहा है। पानी भी व्यर्थ नहीं करना चाहिए। जल ही जीवन है। जल है तो कल है।
हमने कहा- कल की बात तो कल देखी जाएगी, यहाँ तो एक एक दिन भारी पड़ रहा है । रोज हर चीज के भाव बाढ़ रहे हैं। सुना है सरकार ने चुपचाप सोना बेच दिया है। देश के 2 प्रतिशत लोगों को सुरक्षित पेय जल नल से सप्लाई हो रहा है ।स्वच्छता में देश में नंबर वन इंदौर में ‘सबका साथ सबका विकास’ के तहत मल और जल के कनेक्शन उसी तरह से मिल जाते हैं जैसे ईडी से डरकर कोई दलबदलकर भाजपा में शामिल हो जाता है। असुरक्षित जल भी पूरा नहीं मिल रहा है। लगता है अब मुर्दों को भी नहलाने की जगह स्पंज किया जाएगा।
बोला- ज्यादा नहाने से भी कई समस्याएं पैदा होती हैं। इसीलिए पूजा में भी देवताओं को दूब के ब्रश से दो छींटों में स्नान करवा दिया जाता है। अपने टोंक जिले में जिला शिक्षा कार्यालय में एक प्रशासनिक अधिकारी हैं दीनदयाल कसेरा। वे पिछले पाँच सालों से एक लीटर पानी से स्नान करते हैं और इसका जगह जगह प्रदर्शन और प्रशिक्षण भी देते हैं।
हमने कहा- अधिकारी हैं तो उन्हें तो सब अधिकार हैं जैसे शुभेन्दु अधिकारी । चाहें तो ईद पर कुर्बानी में टांग अड़ा दें और चाहें तो योगी जी की 14 साल से बड़ी गौमाता को काटने की छूट दे दें।
बोला- वे अधिकारी होने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांगानेर विभाग के व्यवस्था प्रमुख भी हैं। स्वयंसेवक सुविधा नहीं, सेवा को महत्त्व देता है। वह बिना किसी सुविधा के भी जब मौका देखता है सेवा कर ही डालता है। उसे सेवा के सामने सुविधा की परवाह नहीं होती। इतिहास उठाकर देख, 90 वर्ष तक स्वयंसेवकों ने ठंड में हाफ पेंट में ठिठुरते हुए सेवा की है। बहुत से स्वयंसेवक तो 35-40 वर्ष तक भीख मांगकर भी सेवा करते रहे। निर्धन इतने कि संस्था तक रजिस्टर्ड नहीं और न ही कोई बैंक खाता।
हमने कहा- तोताराम, पानी का क्या है। पानी तो आँख में होना चाहिए जैसे कि ग़ालिब कहते हैं-
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।
हयादार, खुद्दार तो चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाते हैं और बेशर्म गटर में भी बेशर्मी से तैरते रहते हैं । सुना नहीं, जर्मनी के हेस्से राज्य (वित्तीय केंद्र फ्रैंकफर्ट) के वित्त मंत्री थॉमस शेफर ने मार्च 2020 में आत्महत्या कर ली थी। 54 वर्षीय शेफर का शव फ्रैंकफर्ट के पास एक रेलवे ट्रैक पर मिला था। उनकी मृत्यु का कारण कोविड-19 महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों से गहरी चिंता और तनाव बताया गया था।
और एक ये ऐसे बेशर्म हैं कि न अर्थव्यवस्था संभलती है और न ही कानून व्यवस्था। ज्यादा पूछो तो कह देते हैं देश का विभाजन गाँधी के कारण हुआ, हिन्दू खतरे में है, रुपया कांग्रेस के कारण गिर रहा है और ज्यादा तकलीफ है तो पाकिस्तान चले जाओ।
बोला- मन पवित्र होना चाहिए। तन का क्या, नश्वर है । कबीर कहते हैं- न्हाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाय।
हमने कहा- और मन का क्या। उसकी तो केवल बात ही होती है। काम से क्या लेना देना। (लेखक के अपने विचार है)

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