जल संरक्षण

लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
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प्रतिवर्ष मई जून में पानी की किल्लत महसूस होती है। लेकिन अगर हम वर्षा ऋतु का पानी का संचयन कर ले तो किसी हद तक हमें सफलता मिल सकती है। नगर निकाय शहरों में सफाई करवा दे नदी नाले नालियां जितनी भी अटी पड़ी है उसको साफ करवाया जाए शहर में जितना भी कचरा पॉलिथीन का है वह हटवा दिया जाए वो नदी नाले को जाम कर देता है। और इस तरह प्रबंध किया जाए कि जो बड़े नाले का पानी नदी में जाता है उसकी स्वच्छता का विशेष रुप से ध्यान रखें क्योंकि वही पानी नदी में जाएगा तो स्वच्छ रहेगी और हमारे उपयोग में आ सकता है।
आमजन भी सहयोग कर सकता है। अपने घर की छत पर चारों ओर पीवीसी पाइप लगाएं तो सारी छत का पानी एक जगह जमा हो जाएगा और व्यर्थ में बहने की बजाय वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए भूमि में चला जाएगा इससे भू-जल उच्च स्तर पर रहेगा तो हैंडपम्प या ट्यूबवेल के जरिए पानी का उपयोग कर सकते हैं। पीवीसी पाइप की बनाई गयी नाली को पाइप से जोड़ दिया जाता है और उसके जरिए वह पानी टेकर या भूमि में गढ्ढा बना दिया जाए तो भूमि में चला जाता है।
घरेलू स्तर पर भी पानी की बचत की जा सकती हैं। कपड़े इकट्ठे करके एक बार में धोये जाए उस पानी को व्यर्थ न करें। गमलों में, पोंछा लगाने में काम लिया जा सकता है। घर में पानी के लिए छोटी छोटी ग्लास रखें बड़ी ग्लास में पानी पुरा नही पीने पर व्यर्थ, होता है। मेहमानों को भी उसी में सर्व करें। बर्तन सिंक में नल से नहीं धोया जाए और बाल्टी भर कर बर्तन धोने में पानी कम खर्च होगा। (लेखिका के अपने विचार हैं)

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