
फोटो प्रतीकात्मक
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जयपुर। एक तरफ तो आरएसएस अपने पंजीकरण और चंदे तक की जानकारी सरकार को देने से इंकार कर रहा है, और दूसरी तरफ पुलिस महज आरएसएस की आलोचना करने पर युवाओं को जेल में डाल रही है।
यह बात राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज अपने एक्स अकाउंट पर लिखते हुए कहा कि क्या इस देश में अब आरएसएस की आलोचना करना कोई अपराध हो गया है? क्या कोई नया गुप्त कानून बन गया है? गहलोत ने जानकारी देते हुए लिखा कि मंडावा के नवीन की गिरफ्तारी और उसका मोबाइल जब्त करना पूरी तरह तानाशाही है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किस कानून के तहत यह कार्रवाई हुई? हम मन करते है कि नवीन को अविलंब रिहा किया जाए।
उन्होंने आगे लिखा कि राजस्थान में कई जगहों से इस तरह की घटनाएं सामने आईं हैं। लोकतंत्र में सच बोलने की आवाज को पुलिस के दम पर दबाया नहीं जा सकता। झुंझुनूं के पुलिस अधीक्षक किसके इशारे पर ऐसा कर रहे हैं? डीजी पुलिस को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
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