बड़ी डील गंवाने के बाद अनिल अग्रवाल ने बताई वजह

डेलिगेशन क्यों है जरूरी?
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नई दिल्ली। वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने उद्यमी जीवन के शुरुआती दिनों का एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि बिजनेस खड़ा करने के दौरान उन्हें सबसे बड़ा सबक एक बड़ी डील का हाथ से निकल जाने के बाद मिला। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उन्हें ‘डेलिगेशन’ यानी सही व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपने और उस पर भरोसा करने का महत्व समझाया। सोशल मीडिया पर साझा किए अपने अनुभव में अग्रवाल ने लिखा कि शुरुआती दिनों में वह अपने सभी काम स्वयं संभालते थे और खुद को “वन मैन आर्मी” मानते थे। उनकी सुबह खरीदारों से बातचीत में, दोपहर सप्लायर्स के साथ और शाम बैंक के कामकाज में बीतती थी। हालांकि, उन्होंने बताया कि एक दिन केवल एक जरूरी फॉर्म समय पर जमा नहीं हो पाने के कारण एक बड़ी डील उनके हाथ से निकल गई। इसी घटना के बाद उन्होंने पहली बार एक ‘मुंशी’ को नियुक्त किया, ताकि कुछ जिम्मेदारियां दूसरों को सौंपी जा सकें और वह अपने समय का बेहतर उपयोग कर सकें। अपने अनुभव के जरिए अग्रवाल ने यह संदेश दिया कि सफल नेतृत्व केवल कड़ी मेहनत करने में नहीं, बल्कि सही लोगों पर भरोसा करने और जिम्मेदारियां सौंपने की क्षमता विकसित करने में भी निहित है।

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