बाल दान : रमेश जोशी

लेखक : रमेश जोशी
प्रधान सम्पादक, ‘विश्वा’, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, यू.एस.ए.
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आज तोताराम ने आते ही हमारी आत्मा को ललकारा, बोला- ज़िंदगी हो गई कमाते, भोगते लेकिन कभी एक पैसा भी दान दक्षिणा में नहीं दिया । यह सब यहीं धरा रह जाएगा। क्या लेकर आया था और क्या लेकर जाएगा । यही सब कुछ लुटाना है । अपने हाथ से जो दे जाएगा वही इस भवसागर में नाव बनकर तुझे पार लगाएगा ।
हमने कहा- जब हमने हराम का, मुफ़्त का, नाजायज कुछ कमाया ही नहीं तो किस बात का दान दें । हमें तो ऊपर वाले ने जो कुछ दिया काटकर ही दिया है । वही हाल- एक गरीब आदमी था इसलिए उसकी भगवान से डिमांड भी कम ही थी ।उसने ‘सबका साथ : सबका विकास’ की तरह अपने इस प्रोजेक्ट में भगवान को भी 50-50 का आश्वासन देकर शामिल कर लिया । उसने भगवान से चार आने माँगे । कुछ दूर चलकर उसे एक दुअन्नी पड़ी मिली । याचक राम मंदिर के ट्रस्टियों की तरह समझदार था। उसने दो आने जेब में रखते हुए कहा-
अल्ला मियाँ बड़े सयाने। पहले काट लिए दो आने।।
सो हम तो लेने से पहले ही दान दे देते हैं । और हम कौन अंबानी हैं जो लाल बाग के गणेश जी को 20 किलो सोने का मुकुट चढ़ा दें, राम मंदिर में 33 किलो सोना चढ़ा दें, या अपनी बेटी के दो बच्चों के नाम से 300 किलो सोना दान कर दें।
बोला- फिर भी कुछ तो दान-पुण्य किया कर। मन को शांति मिलेगी।
हमने कहा- हमने तो बहुत पहले जब विश्व हिन्दू परिषद वाले दो-दो, पाँच-पाँच रुपए राम मंदिर के लिए इकट्ठे कर रहे थे तब किसी को पाँच रुपये दिए थे । रसीद इसलिए संभाल कर नहीं रखी कि हमें उसके बदले में राम से कुछ नहीं चाहिए । लेकिन जब से राम मंदिर में ट्रस्टियों और मुख्य लोगों ने डाका डाला है हमें उन पाँच रुपये से अधिक अपनी मूर्खता के लिए शर्मिंदगी हो रही है । हमारा तो मानना है कि किसी को किसी भी धार्मिक स्थान पर एक पैसा भी नहीं चढ़ाना चाहिए । उससे बेईमानी को बढ़ावा मिलता है । न होगा चढ़ावा और न मंदिर में जुटेंगे चोर-उचक्के ।
वैसे अब अंबानी जी ने किस मंदिर में कौनसा बड़ा दान दिया है ?
बोला- अनंत अंबानी ने तिरुपति मंदिर में केश दान किए हैं ।
हमने कहा- इसमें कौन बड़ी बात है । रोज हजारों पुरुष ही नहीं स्त्रियाँ तक अपने केश दान करती हैं जो विग बनाने के लिए विदेशों में अच्छी कीमत पर बिकते हैं । और अगर इसीसे कोई पुण्य प्राप्त होता हो तो हम भी अब से अपने केश, जितने भी मोदीराज में महंगाई के बावजूद बच पाए हैं, दान कर दिया करेंगे । तू यहीं से तिरुपति पार्सल कर दिया कर । पार्सल का खर्च तू करेगा या मोदी जी ऐसे पार्सलों के लिए कोई फ्री की स्कीम निकालें । पहले डिफेंस फंड में भेजी गई राशि के लिए मनीऑर्डर का खर्च नहीं लगा करता था । एक बार हमने सन 1999 में पोती के जन्म दिन पर एक हजार रुपये भेजे थे । अगर आज की तरह ‘पी एम केयर फंड’ में भेजते तो किसी हिसाब का भी पता नहीं चलता ।
बोला- तेरे सिर पर चार बाल हैं । तुझे बालों की शोभा का क्या पता । अनंत के ये लंबे, घने, घुँघराले, रेशमी बाल । मेरे खयाल से इन्हें सामान्य बालों की तरह नहीं बेचा जाएगा बल्कि विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा जिनके भक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति से दर्शन किया करेंगे । इसी तरह सोच अगर रबीन्द्रनाथ ठाकुर या मोदी जी केश दान कर दें तो बड़ी बात हो क्योंकि ये उनकी पहचान हैं । अगर मोदी जी दाढ़ी मूंछ मुँड़वाकर जाएँ तो ट्रम्प तो फिर भी पहचान लेंगे लेकिन मेलोनी तो नहीं ही पहचान पाएगी ।
हमने कहा- दान की सबसे बड़ी बात यह है कि उसके लिए आपने कितना कष्ट उठाया । दान के बाद आपके पास बचा क्या ? इसीलिए बुद्ध ने दान में मिले स्वर्ण आभूषणों से बढ़कर एक बुढ़िया द्वारा दिए गए अधखाए अनार को बताया था । क्योंकि उसके पास इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं था । यह भी पता नहीं कि वह कितने दिन की भूखी थी । उसने यह अनार खुद अधभूखे रहकर दिया था । सैंकड़ों करोड़ दान के बाद भी अंबानी-अदानी के पास हजारों लाखों करोड़ और बचे हुए हैं । इस दान के लिए उन्होंने कोई कष्ट नहीं उठाया है ।
भगवान के लिए शबरी के बेर और सुदामा के चावल अधिक महत्वपूर्ण होते हैं ।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की रहने वाली 85 वर्षीय कचरा बीनने वाली महिला बिदुला बाई देवार ने राम मंदिर निर्माण के लिए 20 रुपये का दान दिया था जो इनकी आधे दिन की कमाई थी।
राम मंदिर, कृष्ण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर आदि के चोर पुजारी राम की सोने की रत्न जटित पादुका और सोना चुरा सकते हैं लेकिन सुदामा, शबरी और बिदुला बाई के दान को छू भी नहीं सकते । तभी तो मीरा कहती है-
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
खरच न खूटे चोर न लै हैं
दिन दिन बढ़त सवायो।
(लेखक के अपने विचार हैं)

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