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नई दिल्ली। फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) ने यूरिया के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति (एनआईपीयू)- 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मिली मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे देश में यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। वर्तमान में भारत में यूरिया की मांग हर साल लगभग 5% की दर से बढ़ रही है और इसके 40 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि देश में उत्पादन लगभग 30 एमएमटी है। भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 26% यूरिया आयात करता है। एफएआई के सह-अध्यक्ष डॉ. सिबा प्रसाद मोहंती ने कहा, “एनआईपीयू-2026 भारत के उर्वरक क्षेत्र की सबसे बड़ी संरचनात्मक चुनौती—बढ़ती मांग और स्थिर घरेलू उत्पादन क्षमता के बीच के अंतर—को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नीति निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगी और भारत को यूरिया उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।” मंत्रिमंडल द्वारा 8–9 नए गैस आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित करने का निर्णय, जिनसे 10 एमएमटी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ेगी, इस अंतर को कम करने और देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।