
www.daylifenews.in
मुंबई। भारत के डेयरी क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी क्षमता को जल्द से जल्द मजबूत करना होगा। अल नीनो की स्थिति के कारण कमजोर मानसून, लंबे समय तक चलने वाली लू (हीटवेव) और मवेशियों पर बढ़ते गर्मी के तनाव (हीट स्ट्रेस) का खतरा मंडरा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अनुमान लगाया है कि मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत की लगभग 90% होगी, और 60% संभावना इस बात की है कि यह सीजन कमजोर रहेगा। यह दूध उत्पादन के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि देरी से आने वाले या कमजोर मानसून से गर्मियों के अत्यधिक तापमान से कोई राहत नहीं मिलती। कैप्टन (डॉ.) ए.वाई. राजेंद्र, सीईओ, एनिमल न्यूट्रिशन बिजनेस, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड ने यह जानकारी दी। सीईओ, एनिमल न्यूट्रिशन बिजनेस, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि भले ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन यहाँ की उत्पादकता अब भी कम है। वैश्विक औसत 7.18 किलोग्राम की तुलना में भारत में प्रति गाय प्रतिदिन का औसत दूध उत्पादन केवल 4.87 किलोग्राम है। गर्मी का तनाव इस अंतर को और बढ़ा देता है।