
सुरेश बागड़ी की रिपोर्ट
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मण्डावर (दौसा)। उपखण्ड क्षेत्र में करीब 17 दिन तक मानसून की बेरुखी झेलने के बाद सोमवार को मौसम ने आखिरकार करवट ली। सुबह हुई झमाझम बारिश के बाद दिनभर रिमझिम फुहारों का दौर चलता रहा। इससे भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली। वहीं सूखने की कगार पर पहुंच चुकी ज्वार और बाजरे की फसल को भी नया जीवन मिल गया। बारिश के साथ चली ठंडी हवाओं ने मौसम को खुशनुमा बना दिया और पूरे दिन तापमान में गिरावट महसूस की गई।
क्षेत्र में पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसान चिंतित थे। तेज धूप और उमस भरी गर्मी से खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें प्रभावित होने लगी थीं। ज्वार और बाजरे की फसल में नमी की कमी साफ दिखाई देने लगी थी। लगातार बढ़ते तापमान से आमजन का जनजीवन भी प्रभावित हो रहा था। दोपहर के समय बाजारों में आवाजाही कम हो गई थी और लोग घरों में रहने को मजबूर थे।
सोमवार सुबह करीब नौ बजे अचानक आसमान में काले घने बादल छा गए। इसके बाद करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। तेज बारिश थमने के बाद दिनभर रिमझिम फुहारें पड़ती रहीं। बारिश के कारण सड़कों पर पानी बह निकला और वातावरण में ठंडक घुल गई। लंबे समय बाद मौसम सुहावना होने से लोगों ने राहत की सांस ली। कई लोग घरों और दुकानों से बाहर निकलकर बारिश का आनंद लेते नजर आए।
किसानों का कहना है कि फिलहाल हुई बारिश फसलों के लिए राहत लेकर आई है। हालांकि अभी भी अच्छी पैदावार के लिए लगातार और पर्याप्त बारिश की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो ज्वार और बाजरे की फसल बेहतर होगी। साथ ही अन्य खरीफ फसलों को भी इसका लाभ मिलेगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय हुई बारिश खरीफ फसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इससे खेतों में नमी बनी रहेगी, पौधों की बढ़वार में तेजी आएगी और सिंचाई पर किसानों की निर्भरता भी कम होगी। इसके अलावा लगातार बारिश होने से क्षेत्र के तालाबों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ेगी तथा भूजल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद है। किसानों और आमजन की निगाहें अब मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।