केरल सरकार प्रधानमंत्री श्री स्कूल योजना को लागू करने पर असमंजस में

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतान्त्रिक मोर्चा सरकार सत्ता में आने के बाद राज्य के सियासी तथा शिक्षा क्षेत्र में एक बहस छिड़ी हुई है कि क्या वर्तमान सरकार केंद्र की प्रधान श्री स्कोल योजना को लागू करेगी या नहीं. केंद्र की इस योजना को लागू करने के लिए पिछली वाम मोर्चा सरकार ने इस को लेकर केंद्र के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये थे . यह सहमति गत वर्ष अक्तूबर में बनी थी तथा इस योजना को राज्य में लागू करने लिए लगभग 1200 करोड़ मिलना है . लेकिन इसमें शर्त यह है कि इस योजना के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में नई शिक्षा नीति के आधार पर बनाये गए पाठ्यक्रम को पढ़ाना होगा . उस समय कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाले मोर्चे के घटकों ने इसका विरोध किया था . एक नेता ने तो यहाँ तक कहा था कि अगर विधान सभा चुनावों के बाद राज्य में उनकी सरकार बनी तो वह इस सहमति पत्र को रद्दी के टोकरी में फैंक दिया जायेगा।
इस पर चल रही बहस और विवाद को देखते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने इसके लिए एक कमेटी बनाई है . सरकार का कहना है कि इस कमिटी के रिपोर्ट आने के बाद ही इस मुद्दे पर अंतिम फैसला किया जायेगा. फ़िलहाल इस योजना को लागू करने के प्रस्ताव को ठन्डे बसते में डाल दिया गया है।
राज्य के मुख्यमंत्री वी. डी सतीशन इस योजना को लागू करने के पक्ष में है . उनका कहना है कि इस सहमति पत्र सरकार को अपनी तरफ से रद्द नहीं कर सकती क्योंकि इस पर हमारी सहमति दर्ज है . इसके अनुसार इस योजना को रद्द करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है . अभी तक इस मोर्चे का दूसरे बड़ा घटक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग तथा राज्य कई मुस्लिम संगठन विरोध कर रहे थे . अब कांग्रेस कांग्रेस के भीतर भी इसको लेकर विरोध शुरू हो गया है . लीग के पास 140 सदस्यों की विधानसभा में 22 सदस्य है . इनमें से पांच मंत्री है . अगर लीग इस मुद्दे को लेकर अपना समर्थन वापिस ले लेती है तो सरकार का पतन हो सकता है।
पंजाब सहित कई अन्य राज्यों , जहाँ विपक्ष की सरकारें है , ने इसे लागू करने से इंकार कर दिया था .पंजाब की आप सरकार ने 2023 में औपचारिक रूप से केंद्र को पत्र लिख कर इस योजना लागू नहीं करने का इरादा जता दिया था .लेकिन कुछ समय बाद ही इस योजना को लागू करने पर अपनी सहमति दे दी थी . पहले योजना को नहीं लागू करने तथा बाद में सहमत हो जाने के कारण क्या थे इसके बारे में कोई स्पष्टता सामने नहीं आई . तमिलनाडु में पिछली द्रमुक सरकार ने इस योजना को लेकर कई संवैधानिक तथा कानूनी मुद्दे उठा कर इस योजना को लागू करना परले सिरे से ख़ारिज कर दिया था . राज्य में सी जोसफ के नेतृत्व वाली टी. वी.के पार्टी ने इस मुद्दे अभी तक कोई विचार व्यक्त नहीं किया है लेकिन अनुमान लगाया रहा है कि वर्तमान सरकार भी इस मुद्दे पर द्रमुक की तरह ही रुख अपनाएगी . मुख्य विवाद इन स्कूलों में पढाये जाने वाले पाठ्यक्रम को लेकर है . यह पाठ्यक्रम एन सी आर . टी. ने तैयार किया है. इसमें अन्य बातों के अलावा त्रिभाषी फार्मूले के अनुसार हिंदी पढाया जाना जरूरी है . जबकि दक्षिण के राज्य किसी भी कीमत पर हिंदी पढ़ाने को राजी नहीं। सबसे से अधिक विरोध तमिलनाडु में है। वहां वहां कांग्रेस और बीजेपी को छोड़ सभी बड़े क्षेत्रीय दल हिंदी के घोर विरोधी है. यह विरोध राजनीतिक अधिक तथा सामाजिक रूप से बहुत कम है . एक समय था जब राज्य में हिंदी फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाता था . अब हिंदी फ़िल्में दिखाए जाने का विरोध नहीं के बराबर है . हिंदी के टी वी सीरियल इस राज्य में उतने ही लोकप्रिय है जितने के हिंदी भाषी उत्तर भारत के राज्यों में हैं .
संविधान के अनुसार शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में है. इसके अनुसार केंद्र तथा राज्य सरकारें इस विषय पर नीतियां और कानून बना सकती है . राज्य सकारें हिंदी तथा केंद्र द्वारा बनाये गए पाठयक्रम को लागू करने अथवा लागू नहीं करने पर स्वतन्त्र है . इसी प्रावधान को लेकर दक्षिण के राज्य त्रिभाषी फार्मूले , जिसमें हिंदी पढाया जाना अनिवार्य है, की बार बार दुहाई देते है.
केरल के मुख्यमंत्री सतीशन का कहना है कि अगर राज्य सरकार को अपना पाठ्यक्रम पढाये जाने की अनुमति दे दी जाये तो वे पर राज्य में प्रधानमंत्री श्री स्कूल योजना को लागू करने को तैयार है . इस योजना का विरोध करने वालों को वे यह कहते है अगर इस योजना को लागू करने से सरकार को 1200 करोड़ रूपये मिलते है तो इससे राज्य में शिक्षा के सुधार तथा विकास को सहायता मिलेगी , देश में केरल ऐसा राज्य है जहाँ शिक्षा की दर 100 प्रतिशत है . यानि राज्य का हर व्यक्ति पढ़ा लिखा है। (लेखक के अपने विचार हैं)

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