
कमर्शियल किचन कामगारों पर प्रदूषण और गर्मी का खतरा
निशांत की रिपोर्ट
लखनऊ (यूपी) से
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नई स्टडी में अमेरिका के 27 कमर्शियल किचन की निगरानी, गैस और प्रोपेन वाले किचन में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और गर्मी का स्तर कई जगह स्वास्थ्य मानकों से ऊपर मिला
रेस्टोरेंट के किचन में काम करने वाले कर्मचारियों को सिर्फ लंबे समय तक गर्मी में काम करने की समस्या नहीं है। गैस और प्रोपेन से चलने वाले किचन में खाना पकाने के दौरान हवा में ऐसे प्रदूषकों का स्तर भी बढ़ सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए तय मानकों से ज्यादा हो।
अमेरिका में 27 कमर्शियल किचन में की गई एक नई स्टडी में पाया गया कि करीब 70 फीसदी गैस वाले किचन में काम करने वाले कर्मचारियों का प्रदूषण और गर्मी से एक्सपोजर स्वास्थ्य संबंधी गाइडलाइन से ज्यादा था।
यह स्टडी PSE Healthy Energy, Stanford University और NYU Grossman School of Medicine के शोधकर्ताओं ने Forward Dining Solutions के साथ मिलकर की है। इसमें कैलिफोर्निया, पेंसिल्वेनिया और न्यूयॉर्क के 27 कमर्शियल किचन शामिल थे। इनमें 24 किचन प्राकृतिक गैस या प्रोपेन से चलते थे, जबकि तीन पूरी तरह इलेक्ट्रिक थे।
शोधकर्ताओं ने किचन में काम करने वालों के लिए प्रासंगिक अलग-अलग जगहों पर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), बेंजीन, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और तापमान की निगरानी की। माप खाना पकाने के दौरान और रात में किचन बंद होने के बाद भी लिए गए।
यह पहली अमेरिकी स्टडी है जिसमें गैस, प्रोपेन और पूरी तरह इलेक्ट्रिक कमर्शियल किचन में काम करने वाले कर्मचारियों के वास्तविक एक्सपोजर की इस तरह तुलना की गई है।
वेंटिलेशन होने के बावजूद प्रदूषण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
स्टडी में पाया गया कि किचन में लगे ventilation hoods प्रदूषकों की मात्रा कम तो करते हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते।
खाना पकाने के दौरान 24 गैस वाले किचन में से 17 में, यानी करीब 70 फीसदी जगहों पर, ventilation hood के बाहर काम करने वालों की जगह पर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का एक घंटे का औसत स्तर अमेरिकी Environmental Protection Agency के 100 parts per billion (ppbv) के मानक से ऊपर था।
एक किचन में 15 मिनट का औसत स्तर 1,000 ppbv से भी ऊपर पहुंच गया। यह NIOSH के short-term occupational exposure limit से भी ज्यादा था।
दूसरे प्रदूषकों का स्तर भी कुछ किचन में स्वास्थ्य संबंधी मानकों से ऊपर मिला। तीन गैस वाले किचन में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर California की एक घंटे की exposure guideline, 20 parts per million, से ज्यादा था।
वहीं पांच किचन में बेंजीन, जिसे कैंसर पैदा करने वाला प्रदूषक माना जाता है, का स्तर California की एक घंटे की guideline 8.4 ppbv से ऊपर दर्ज किया गया।
इसके उलट, स्टडी में शामिल तीनों all-electric किचन में खाना पकाने के दौरान किसी भी प्रदूषक का स्तर तय threshold से ऊपर नहीं गया।
गैस वाले किचन में गर्मी भी बड़ी समस्या
प्रदूषण के साथ किचन के अंदर की गर्मी भी चिंता का विषय बनी।
तापमान की निगरानी वाले 19 गैस किचन में से 13 में, यानी करीब 68 फीसदी में, तापमान 90°F यानी लगभग 32°C से ऊपर गया। यह California के indoor heat illness prevention regulations और OSHA के प्रस्तावित high-heat trigger से जुड़ी सीमा के ऊपर था।
इन 13 किचन में से 10 में अधिकतम तापमान 100°F यानी करीब 37°C से ऊपर पहुंचा। चार किचन में तापमान 122°F यानी 50°C से भी ज्यादा दर्ज किया गया।
खास बात यह रही कि बाहर का तापमान कम होने पर भी किचन के अंदर गर्मी काफी ज्यादा थी।
जिन 13 गैस किचन में 90°F से ज्यादा तापमान दर्ज हुआ, उनमें से 10 में यह स्थिति उन दिनों भी देखी गई जब बाहर का तापमान 75°F यानी करीब 23°C से नीचे था।
इससे शोधकर्ताओं का कहना है कि किचन में अत्यधिक गर्मी सिर्फ बाहर के मौसम की वजह से नहीं थी। गैस जलने से पैदा होने वाली गर्मी भी इसका एक प्रमुख कारण हो सकती है।
एक शेफ के शरीर पर लगाए गए तापमान मॉनिटर से करीब पांच घंटे की ड्यूटी के दौरान औसत तापमान 92°F यानी 33°C दर्ज हुआ। इस दौरान यह 106°F यानी करीब 41°C तक पहुंच गया।
रात में किचन बंद होने के बाद भी प्रदूषण
स्टडी का एक और दिलचस्प निष्कर्ष किचन के उस समय से जुड़ा है जब वहां खाना नहीं पकाया जा रहा था।
22 गैस या प्रोपेन वाले किचन में से 16 में रात के समय नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और बेंजीन का स्तर दिन के मुकाबले ज्यादा पाया गया।
शोधकर्ताओं ने इसकी एक संभावित वजह गैस उपकरणों की pilot lights को बताया है, जो किचन बंद होने के बाद भी जलती रहती हैं। उस समय ventilation भी बंद हो जाने से प्रदूषक अंदर जमा हो सकते हैं।
सात किचन में रात के दौरान नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर 100 ppbv के मानक से ऊपर चला गया।
इसका मतलब है कि समस्या सिर्फ खाना पकाने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकती। रात में सफाई करने वाले कर्मचारी या सुबह सबसे पहले काम पर पहुंचने वाले लोग भी ऐसे प्रदूषण के संपर्क में आ सकते हैं।
पूरी तरह इलेक्ट्रिक किचन में दिन या रात किसी भी समय कोई प्रदूषक threshold से ऊपर नहीं गया।
अमेरिका में करीब 50 लाख लोग किचन में काम करते हैं
अमेरिकी restaurant और food service industry में करीब 1.57 करोड़ लोग काम करते हैं। इनमें लगभग 50 लाख लोग अपना पूरा कामकाजी समय किचन में बिताते हैं।
स्टडी के मुताबिक, गैस से होने वाला combustion इन कर्मचारियों को एक साथ वायु प्रदूषण और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में ला सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ventilation की प्रभावशीलता और इस्तेमाल होने वाला fuel, दोनों कमर्शियल किचन की indoor air quality और तापमान को प्रभावित करने वाले ऐसे कारक हैं जिन पर कार्रवाई की जा सकती है।
स्टडी अमेरिका के किचन में की गई है, इसलिए इसके निष्कर्षों को सीधे भारत के हर रेस्टोरेंट या होटल किचन पर लागू नहीं किया जा सकता। लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि जहां बड़े पैमाने पर गैस से खाना पकाया जाता है, वहां किचन में काम करने वाले लोगों की हवा और गर्मी से होने वाली exposure को occupational health के हिस्से के रूप में कितना देखा जाता है। (लेखक के अपने विचार हैं)