

रंगमंच से रामलीला तक, साहित्य से मंच संचालन तक
शैलेश माथुर की रिपोर्ट
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सांभरझील। मृदुभाषी एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी दिवंगत बल्लभदास आचार्य के पुत्र राजेश आचार्य की पांच दशक से अधिक लंबी कला-साधना सांभर सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा ही नहीं बल्कि अनेक उभरते युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। इस महान शख्सियत की पहचान केवल रंगकर्मी के रूप में नहीं, बल्कि रंगमंच, रामलीला, साहित्य, कविता, लेखन और मंच संचालन—इन सभी क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय व्यक्तित्व के रूप में भी रही है। यह बताना भी लाजमी है कि राजेश आचार्य परमात्मा की खुद एक ऐसी कृति है, जो परमात्मा का माध्यम बनकर ही अपनी इस लौकिक लीला को बखूबी निभा रहे हैं। पारिवारिक व आध्यात्मिक संस्कारों को आत्मसात कर यह भी सिद्ध कर दिया कि जीवंत परमात्मा की अनुभूति माता-पिता के साए में रहकर ही महसूस की जा सकती है। उनकी खूबियों के खजाने में स्व रचित अनेक ऐसी खूबसूरत रचनाएं हैं जो कलाकार की आत्मिक भाव को निश्चल प्रेम के रूप में दर्शाती है। आकाशवाणी एक दूरदर्शन पर भी इन्होंने अपनी प्रस्तुतियां पेश कर एक ठोस अंदाज में अपनी छवि को स्थापित किया। इन दोनों ही जगहों से बी हाई ग्रेड ड्रामा आर्टिस्ट होने की उपलब्धि भी दर्ज करवाई। राजेश आचार्य का नाम राजस्थान के ख्यातनाम वरिष्ठ रंग कर्मियों के रूप में आदर के साथ लिया जाता है। वरिष्ठ रंग कर्मियों के सानिध्य में भी इन्होंने मंच पर नाट्य प्रस्तुतियां दी जो तारीफे काबिल रही। करीब 400 से अधिक गीतों व कविताओं की रचना कर उन्होंने कला प्रेमियों के लिए एक नायाब उदाहरण पेश किया। 300 से अधिक स्वरचित एकाकक्षरी कविताएं, 20 से अधिक स्वरचित नाट्य आलेख व नृत्य नाटिकाओं की रचना कर सभी को अपना मुरीद बना लिया, इतना ही नहीं राज्य स्तरीय नाट्य प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनकर तीन दफा सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का किताब हासिल कर कला जगत में यह भी सिद्ध कर दिखाया कि कला किसी की मोहताज नहीं होती। खुद की काबिलियत पर नाट्य विभाग, यूनिवर्सिटी ऑफ़ राजस्थान के लिए दो साल तक गेस्ट स्पीकर पैनल में अनुमोदित भी रहे। आज भी राजेश आचार्य का प्रस्तुतियां पेश करने का निराला अंदाज हजारों दिलों पर मुहर की तरह चस्पा है। आपको यह भी बता दें कि अनेक मंचों से उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है, जिनमें प्रमुख रूप से सर्वशक्ति मित्र मंडल द्वारा रंगकर्म एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु सार्वजनिक सम्मान, जय हिंद सैल्यूट तिरंगा की ओर से रंगकर्म एवं काव्य साधना के क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु नागरिक अभिनंदन, नगरपालिका सांभर द्वारा सांभर की रामलीला मे सर्वश्रेष्ठ अभिनय एवं निर्देशन हेतु सम्मान एवं ब्राह्मण समाज द्वारा सांस्कृतिक क्षेत्र में विशेष योगदान पर मिले सम्मान को राजेश आचार्य परमात्मा का ही आशीर्वाद मानते हैं। 1100 से अधिक राज्य व राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमो, सार्वजनिक समारोह, एवं रामलीला में मंच संचालन का उन्हें अवसर मिला तो उनकी प्रतिभा में और ज्यादा निखार आता चला गया। रेडियो एवं दूरदर्शन से कई स्वरचित नाट्य आलेख, नृत्य नाटिकाएं एवं गीत प्रसारित होने के बाद अन्य प्रदेशों में भी उन्होंने अपना वर्चस्व स्थापित कर दिखाया। सांभर की रामलीला अभिनय समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में विगत 20 वर्षो से अनवरत रामलीला निर्देशन करते उन्होंने छिपी प्रतिभाओं को मंच के माध्यम से आगे लाने के लिए अनेक रास्ते खोले साथ ही वर्ष 1970 से रामलीला में अंगद, दशरथ, परशुराम, तथा केवट की प्रभावी जीवंत भूमिका निभाते हुए आध्यात्मिकता का संदेश भी दे रहे हैं।