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जयपुर। भारत में हमेशा से परंपरा रही है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले सत्ता पक्ष विपक्ष को विश्वास में लेता है। यह मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल है, फिर भी मेरी समझ से परे है कि परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे इतने बड़े मुद्दे पर सरकार विपक्ष से बात क्यों नहीं कर रही। इसमें क्या रहस्य है?
यह बात राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखते हुए आगे कहा कि पिछली बार जब संसद का विशेष अधिवेशन बुलाकर यह बिल लाया गया था, तब भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से इस बिल को बंगाल व तमिलनाडु के चुनावों के बाद लाने और व्यापक सहमति के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। मोदी सरकार ने तब भी हठधर्मिता दिखाई और सर्वदलीय बैठक बुलाने के बजाय अलग-अलग पार्टियों से अलग-अलग चर्चा की।
उन्होंने आगे लिखा पूरा देश चाहता है कि पक्ष और विपक्ष मिलकर इस पर फैसला करें, तो फिर मोदी सरकार ऐसी हठधर्मिता क्यों दिखा रही है? देश जानना चाहता है कि इसके पीछे भाजपा का क्या छिपा एजेंडा है? देश चाहता है कि मोदी सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए और सबको साथ लेकर फैसला करे। https://x.com/ashokgehlot51/status/2111404449986150438