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मुंबई। भारत में अब तक स्वास्थ्य बीमा को मुख्य रूप से अस्पताल में भर्ती होने के दौरान मिलने वाली आर्थिक मदद के तौर पर देखा जाता रहा है। लोग पॉलिसी इस उम्मीद में खरीदते थे कि उन्हें इसका इस्तेमाल कभी न करना पड़े और जरूरत सिर्फ किसी बड़ी बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी के समय ही पड़े। लेकिन अब यह सोच बदल रही है। धीरे-धीरे ही सही, स्वास्थ्य बीमा का दायरा अस्पताल में भर्ती होने से आगे बढ़ रहा है। यह जानकारी श्रीश रामचंद्र महुली, चीफ बिजनेस ऑफिसर, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस ने दी। उन्होंने आगे बताया कि ओपीडी को बीमा के दायरे में शामिल करने की बढ़ती मांग महज एक नया उत्पाद पेश करने का चलन नहीं है। इसकी वजह यह है कि देश में लोग स्वास्थ्य सेवाओं का इस्तेमाल पहले से काफी अलग तरीके से करने लगे हैं। श्रीश रामचंद्र महुली ने आगे बताया कि पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य बीमा को लेकर ग्राहकों की अपेक्षाएं काफी बदली हैं। पहले किसी बीमा कंपनी की पहचान इस बात से होती थी कि अस्पताल में भर्ती होने पर वह क्लेम का निपटारा कितनी आसानी से और कितनी जल्दी करती है। लेकिन अब ग्राहक चाहते हैं कि उनकी बीमा पॉलिसी अस्पताल में भर्ती होने के अलावा भी रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों में काम आए।