दीपावली 2026 नवगीत


लेखक : वेदव्यास
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार हैं
www.daylifenews.in
दीप हूं जलता रहूंगा, आंधियों के गांव में
मैं पथिक चलता रहूंगा, धूप हो या छांव में।
त्याग मेरी ज़िन्दगी की एक धारा है
मौत से खेलें यही जीवन हमारा है
मैं अजय हूं, मैं अडिग हूं, ज्योति की ज्वाला
तम पिया मैंने दिया धरती को उजियाला
दीप हूं जलता रहूंगा, आंधियों के गांव में
मैं पथिक चलता रहूंगा, धूप हो या छांव में।
हर जवानी दीप है वो झुक नहीं सकती
शूल राहों में बिछे हों रुक नहीं सकती
मैं विजय की हूं किरण युग बांध ना पाया
प्राण देने के लिये, जल जल के मुस्काया।
दीप हूं जलता रहूंगा, आंधियों के गांव में
मैं पथिक चलता रहूंगा, धूप हो या छांव में।
यह उजाला दीप के बलिदान का बल है
जागरण की यह घड़ी, निर्माण का कल है
मैं नई आशा, नया शुभ प्रातः लाऊंगा
मैं धरा पर स्वर्ग की आभा सजाऊंगा
दीप हूं जलता रहूंगा, आंधियों के गांव में
मैं पथिक चलता रहूंगा, धूप हो या छांव में।