कर्नाटक में मतदाता सूचियों से नाम कटवाने पर हंगामा

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
www.daylifenews.in
कर्नाटक में , जहाँ कांग्रेस पार्टी की सरकार है , मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान तथा कथित फर्जी मतदाताओं के नाम कटवाए जाने की घटनाएँ एक बड़ा मुद्दा बन गया है . इसको लेकर एक दर्ज़न स्थानों पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी है तथा हर रोज़ ऐसे नए मामले समाने आ रहे है . बताया जाता है के कि संगठित तरीके से परस्पर विरोधी दलों के नेता एक दूसरे के समर्थक समझे जाने वाले मतदातायों के नाम के नाम कटवाने के प्रयासों में लगे है . यहाँ तक कि यह मामला चुनाव आयोग तक पहुँच गया और उसे इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
यह सारा मामला प्रारंभिक मतदाता सूचियों के प्रकाशन के बाद शुरू हुआ . ये वे सूचियों थी जिसके अनुसार इसमें शामिल मतदातायों को वास्तविक मतदाता पाया गया था . बेल्लारी जिले के एक बूथ के अधिकारी को इस साथ और लगभग एक जैसे लगभग 7500 फार्म नंबर 7 मिले जिसमें ऐसे मतदातायों के नाम थे जिनके बारे में दावा किया गया था कि वे अपने लिखे पते पर न नहीं मिले या फिर किसी और स्थान पर चले गए है . फॉर्म 7 इसलिए बनाया गया है जिसके जरिये जो कोई मतदाता इस आधार पर अपना नाम मत डाटा सूची से कटवा सके जो पुरानी सूची में लिखे पते अब नहीं रहता . इसी प्रकार परिवार का कोई सदस्य यह फॉर्म भरकर यह निवेदन कर सकता है कि उनके परिवार के किसी एक सदस्य की मृत्यु हो चुकी है इसलिए उनका नाम मतदाता सूची से अब हटा दिया जाये. संबधित बूथ अधिकारी एक साथ तथा एक ही प्रकार के से भरे फॉर्म देख कर चौंक गया. उसने मामले को उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया . बताया जाता है कि ये सारे फॉर्म बेल्लारी महानगरपालिका में विपक्ष के नेता मोथकर ने जमा करवाए थे. वे स्थानीय बीजेपी के बड़े नेता हैं। जो 7500 फॉर्म जमा करवाए गए थे उन सब में अल्प संख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम दर्ज थे . यह घटना सामने आते ही कांगेस के स्थानीय नेता चौंक गए . उन्होंने बंगलुरु में अपने बड़े नेताओं से संपर्क किया . वहां से उनको यह निदेश मिला कि इस मामले को लेकर फ्रॉड करने का मामला स्थानीय पुलिस में दर्ज करवाया जाये . बाद में राज्य कांग्रेस के यह शंका हुई या जानकारी मिली कि ऐसा ही बीजेपी दवारा एक संगठित तरीके से कुछ अन्य जिलों में भी करवाया जा सकता है यह करवा चुकी है।
राज्य के प्रमुख चुनाव अधिकारी के पास जब यह मामला पंहुचा उन्होंने सारे अपने यह मंगवा लिए तथा उन्होंने बूथ अधिकारियों को यह निदेश दिया कि वे एक दिन में एक दिन में किसी एक व्यक्ति से 10 से अधिक फॉर्म स्वीकार नहीं करें . जब मामला चुनाव आयोग के पास पंहुचा तब वहाँ से एक दिन में एक व्यक्ति से फॉर्म 7 लेने की सीमा घटाकर कर सात कर दी।
इससे पहले यह बात भी सामने आई कि पूर्व में ईमेल के जरिये नाम हटाने जाने के कई मामले सामने थे . जब उस मतदाता से सम्पर्क किया गया जिसका नाम कटवाने का अनुरोध यानि फॉर्म 7 मिला था , तो उसने बताया की उन्होंने ऐसा कोई आवेदन नहीं किया . बताया जाता है कि नाम कटवाने वाले लोगों ने साइबर कैफे की सेवायों का उपयोग किया . बताया है कि अपने विरोधी मतदातायों के नाम कटवाने का धंधा पिछले कई सालों से चल रहा है लेकिन चुनाव आयोग की जानकारी में नहीं लाया गया अगर यह ध्यान में लाया गया तो कोई कार्रवाई नहीं की गई . हे बार लोकसभा तथा विधान सभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों का संक्षिप्त पुनरीक्षण होता है . इसी कर्म में कर्नाटक में 2023 के विधान सभा चुनावों से पूर्व मतदाता सूचियों को संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया हुई तो बंगलूरु महानगर में विरोधियों दवारा मतदाता सूचियों से नाम कटवाने के कई मामले समाने आये लेकिन यह सब छोटे स्तर पर हुआ था इसलिए मामलों को अनदेखा कर दिया गया . मतदाता सूचियों से नाम कटवाने के धंधे है सभी दलों के नेता शामिल है .आम तौर जब किसी भी दल का कोई नेता पार्टी का टिकट मिलने का पूरा भरोसा रख कर चलता है तो वह इस बात की कोशिश करता है कि मतदाता सूचियों में से उन मतदातायों के नाम कट जाएँ जो उनको वोट नहों देने वाले . उसकी पार्टी के कार्यकर्ता हर मोहल्ले जा कर यह सर्वेक्षण करते हैं कि उस मोहल्ले में कौन उनका वोटर है और कौन नहीं . इसके बाद ही नाम कटवाने गोरख धंधा शुरू हो जाता है। (लेखक के अपने विचार हैं)

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