
आगरा मंडल में ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत अभियान
सुरेश बागड़ी की रिपोर्ट
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मण्डावर (दौसा)। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में भटकने वाले तथा विभिन्न परिस्थितियों में फंसे बच्चों की सुरक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की ओर से चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ कई बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है। आगरा मंडल में इस अभियान के तहत अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक सात महीनों में आरपीएफ ने कुल 72 बच्चों को सुरक्षित बचाया। इनमें 37 लड़के और 35 लड़कियां शामिल हैं।
मंडल रेल प्रबंधक आगरा गगन गोयल के निर्देशन तथा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त आगरा एस. रामकृष्णन के मार्गदर्शन में आरपीएफ की ओर से यह अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों और रेल परिसर में असुरक्षित परिस्थितियों में मिलने वाले बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
आरपीएफ के अनुसार बचाए गए बच्चों में लापता, अपहृत, मानसिक रूप से अस्वस्थ तथा बेघर बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा ऐसे बच्चे भी मिले, जो किसी कारणवश घर छोड़कर रेलवे स्टेशन या ट्रेनों तक पहुंच गए थे। आरपीएफ जवानों ने संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए इन बच्चों को सुरक्षित संरक्षण दिलाने की दिशा में काम किया।
रेलवे नेटवर्क पर रखी जाती है नजर
‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ केवल बच्चों को रेस्क्यू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे नेटवर्क में बाल सुरक्षा को मजबूत करने की पहल भी है। इसके तहत आरपीएफ जवान लगातार रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में निगरानी रखते हैं। संदिग्ध परिस्थितियों में अकेले या असुरक्षित अवस्था में मिलने वाले बच्चों से पूछताछ कर उनकी पहचान और परिजनों तक पहुंचने के प्रयास किए जाते हैं। बच्चों से संबंधित आवश्यक जानकारियां ट्रैक चाइल्ड पोर्टल पर भी उपलब्ध रहती हैं, जिससे उनकी पहचान और पुनर्वास की प्रक्रिया में मदद मिलती है।
आरपीएफ का यह अभियान घर से भागे, लापता और संकटग्रस्त बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ रेलवे परिसर को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।