डेढ़ साल से चीन का कार्बन एमिशन लगभग स्थिर, आगे गिरावट के आसार

निशांत की रिपोर्ट
लखनऊ (यूपी) से
www.daylifenews.in
दुनिया के सबसे बड़े कार्बन एमिटर चीन में आखिरकार हवा का रुख बदल रहा है। मार्च 2024 से लगातार 18 महीनों से चीन का कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) एमिशन या तो स्थिर है या मामूली गिरावट पर। अब 2025 की तीसरी तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि यह रुझान कायम है। एमिशन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि अर्थव्यवस्था और बिजली की मांग दोनों में वृद्धि दर्ज की गई।
यह ठहराव यूं ही नहीं आया। पिछले डेढ़ साल में चीन ने जिस गति से सौर और पवन ऊर्जा अपनाई है, उसने ऊर्जा तंत्र की तस्वीर ही बदल दी है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तेज़ी से बढ़ती मांग ने तेल और डीज़ल की खपत को कम किया, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एमिशन में 5% की गिरावट आई।
सौर और पवन ऊर्जा ने थामा मोर्चा
तीसरी तिमाही में चीन में बिजली की मांग 6.1% बढ़ी, जबकि साल की पहली छमाही में यह वृद्धि 3.7% थी। इसके बावजूद बिजली क्षेत्र से CO₂ एमिशन स्थिर रहा। वजह थी—सौर ऊर्जा में 46% और पवन ऊर्जा में 11% की रिकॉर्ड वृद्धि।
साल के पहले नौ महीनों में चीन ने 240 गीगावॉट सौर और 61 गीगावॉट पवन क्षमता जोड़ी। यह गति इतनी तेज़ है कि 2025 अब तक का सबसे बड़ा ‘ग्रीन इंस्टॉलेशन ईयर’ बनने की राह पर है। गैर-जीवाश्म स्रोतों से लगभग 90% नई बिजली मांग पूरी हुई—यह दर्शाता है कि चीन अब ऊर्जा संक्रमण के निर्णायक मोड़ पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों की दक्षता भी थोड़ी बढ़ी और गैस आधारित बिजली उत्पादन का हिस्सा बढ़ा। इससे कुल एमिशन पर दबाव नहीं बढ़ा।
सीमेंट ठंडा पड़ा, इस्पात ने राहत दी
निर्माण क्षेत्र की सुस्ती ने एमिशन को नियंत्रित करने में बड़ी भूमिका निभाई। 2025 की तीसरी तिमाही में सीमेंट उत्पादन से एमिशन 7% और धातु उद्योग से 1% घटा। चीन का रियल एस्टेट सेक्टर पिछले दो साल से संकट में है, जिससे इस्पात और सीमेंट दोनों की मांग घटी है।
हालांकि, दिलचस्प यह है कि इस्पात उत्पादन में कुल 3% की गिरावट के बावजूद एमिशन में उतनी कमी नहीं आई, क्योंकि गिरावट मुख्यतः उन इकाइयों में हुई जो पहले से ही अपेक्षाकृत स्वच्छ, इलेक्ट्रिक-आर्क तकनीक से स्टील बनाती हैं। कोयले पर आधारित पारंपरिक स्टील उत्पादन अभी भी उद्योग पर हावी है, जिससे स्वच्छ तकनीकों की हिस्सेदारी सीमित रह गई है।
केमिकल इंडस्ट्री बनी नई चुनौती
जहां एक ओर कोयला, सीमेंट और ट्रांसपोर्ट से एमिशन घटा, वहीं चीन के केमिकल सेक्टर ने इसकी भरपाई कर दी। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में केमिकल उद्योग से CO₂ एमिशन तेज़ी से बढ़ा, क्योंकि प्लास्टिक, फाइबर और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन बढ़ा।
2025 के पहले नौ महीनों में प्राइमरी प्लास्टिक का उत्पादन 12%, केमिकल फाइबर 11% और एथिलीन 7% बढ़ा। इसका कारण है—‘मेड इन चाइना’ के तहत आयात पर निर्भरता घटाने की नीति, जिसके तहत चीन अब अपने घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है।
तेल की मांग में भी यही रुझान दिखा। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में तेल की खपत 5% घटी, लेकिन अन्य उद्योगों—खासकर केमिकल्स—में यह 10% बढ़ी, जिससे कुल तेल खपत में 2% की वृद्धि दर्ज की गई।
EVs और गर्मियां दोनों ने बदली बिजली की कहानी
इलेक्ट्रिक वाहनों की तेज़ी से बढ़ती बिक्री ने पेट्रोल-डीज़ल की खपत घटाई है। साथ ही, चीन में लगातार बढ़ती गर्मी और एयर कंडीशनिंग के इस्तेमाल ने बिजली की मांग को बढ़ाया।
रिपोर्ट बताती है कि 2015 से 2025 के बीच ‘कूलिंग डिग्री डेज़’ यानी एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता वाले दिनों की संख्या में 33% की वृद्धि हुई है। गर्मियों के महीनों (जून-अगस्त) में बिजली की मांग औसतन 6.8% बढ़ी, जबकि बाकी महीनों में यह 4.6% रही।
अगर यह मौसमी पैटर्न जारी रहा, तो सर्दियों में मांग घटने के साथ 2025 का साल कुल मिलाकर गिरावट वाला साबित हो सकता है।
नीतिगत संकेत: एमिशन पीक के करीब
हालांकि 1% की बढ़ोतरी या कमी तकनीकी रूप से बहुत बड़ी बात नहीं लगती, मगर इसका प्रतीकात्मक अर्थ बहुत बड़ा है। चीन की सरकार ने अब तक “2030 से पहले एमिशन चरम पर पहुंचाने” का लक्ष्य रखा है, लेकिन सटीक साल तय नहीं किया।
अगर 2025 में एमिशन गिरता है, तो यह चीन के ‘पीक इमीशन्स’ का शुरुआती संकेत होगा—और वैश्विक जलवायु वार्ता में एक बड़ा मोड़।
रिपोर्ट यह भी कहती है कि चीन अपने मौजूदा पांच वर्षीय योजना (2021-2025) के तहत तय 18% कार्बन इंटेंसिटी कटौती के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगा। अब तक गिरावट लगभग 12% है। इसका मतलब है कि अगले चरण (2026-2030) में लक्ष्य और कठोर करना होगा—कम से कम 22-24% की अतिरिक्त कमी की जरूरत होगी ताकि 2030 तक GDP के अनुपात में 65% की कमी हासिल की जा सके।
कोयला अब भी बोझ बना हुआ
फिलहाल चीन में 230 गीगावॉट नए कोयला बिजली संयंत्र निर्माणाधीन हैं। अगर इनका संचालन शुरू होता है और मांग बनी रहती है, तो मौजूदा संयंत्रों की उपयोग दर 51% से गिरकर 43% तक जा सकती है।
यह स्थिति सरकार को कोयला विस्तार पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर सौर और पवन ऊर्जा की गति थोड़ी भी धीमी हुई, तो एमिशन फिर ऊपर जा सकता है।
नीचे से ऊपर तक का बदलाव
चीन की मौजूदा नीतियाँ दिखाती हैं कि ऊर्जा संक्रमण अब केवल जलवायु की मजबूरी नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति बन गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर बैटरियों और सौर पैनलों तक—हर सेक्टर में चीन ने नई औद्योगिक क्रांति शुरू कर दी है।
हालांकि, नई नीति व्यवस्था के तहत अब सौर और पवन परियोजनाओं को बाज़ार मूल्य पर अनुबंध करने होंगे। इससे नई परियोजनाओं की गति फिलहाल धीमी हुई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक स्थायी बदलाव का हिस्सा है, जो भविष्य में अधिक प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी ऊर्जा बाज़ार बनाएगा।
कहानी का निष्कर्ष
कभी दुनिया का प्रदूषण इंजन कहलाने वाला चीन अब उस मोड़ पर खड़ा है, जहां सूरज और हवा कोयले से मुकाबला कर रहे हैं—और जीत रहे हैं।
चाहे एमिशन घटे या स्थिर रहे, संकेत साफ हैं—चीन का ऊर्जा भविष्य अब नवीकरणीय दिशा में है।
अगर यह रफ्तार जारी रही, तो 2025 इतिहास में उस साल के रूप में याद किया जाएगा, जब चीन ने पहली बार “कार्बन को रोका और सूरज को आगे बढ़ाया।” (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)

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