
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़, (राजस्थान)
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चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध के बावजूद भी अत्यंत आसानी से उपलब्ध है। सुति पारंपरिक धागे के मुकाबले यह अत्यंत सस्ता होता है। भारतीय बाजार में यह आसानी से उपलब्ध है और ऑनलाइन सर्विस भी है। अब स्थानीय स्तर पर भी इसका निर्माण होने लगा है और इसकी आपूर्ति भी की जाती है। विक्रेता इंक्रीप्टेड व व्हाट्स ग्रुप के जरिए गुप्त रूप से भी इसकी आपूर्ति करते हैं। यह नायलॉन व सिंथेटिक धागे से बनता है इसको कांच से लेपित किया जाता है।
मकर संक्रान्ति पर्व पर हमारे देश में पतंग उड़ाने का रिवाज है। युवा वर्ग अति उत्साह में ज्यादा से ज्यादा पतंग काटने के मूड में रहते है। चीनी मांझे पर कांच का लेप होता है पतंग आसानी से कट जाती है अपनी क्षणिक खुशी के लिए वे आवेश में आ जाते है लेकिन इससे राह चलते लोगो की जान खतरे में पड़ जाती है। दो पहिया वाहन पर गुजरने वाले के गले में लिपट जाता है चलती गाड़ी में जब तक वो कुछ समझे तब तक धागा उसके गले में लिपट जाता है और गला कट जाता है।कितनी बार हाथ गाड़ी पर होता है तो हाथ पर धागा लिपटने से दुर्घटना हो जाती है। इसके अलावा आकाश में उड़ते हुए पक्षी भी इनके शिकार हो जाते है। कुछ तो घायल अवस्था में नीचे गिर जाते हे कुछ मर जाते है। किसी की तो हालत इतनी गंभीर हो जाती है न वो मर सकता है न जी सकता है। पक्षी प्रेमी मकर संक्रांति के दिन जगह-जगह पर खड़े होकर इनकी देखभाल करते है। पतंग उड़ाने वाले की नैतिक जिम्मेदारी है कि संध्या समय जब पक्षियों के घोंसले में लौटने का समय हो तो कुछ समय के लिए रुक जाए।
देश में चाइनीज मांझे पर कानूनी प्रतिबंध भी है लेकिन कानूनी प्रवर्तन लचीला होने के कारण खरीदने वाला व बेचने वाला दोनो बच जाते है। अगर सरकार सख्ती से काम लेकर पुराना स्टॉक नष्ट कर दे व विक्रेता पर सख्त कार्रवाई हो तो राहगीरों व पक्षियों को जान का खतरा नहीं रहेगा।