आंध्र प्रदेश में बीजेपी संगठन मजबूत करने में लगी

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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आंध्र प्रदेश में बीजेपी तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाली साझा सरकार का हिस्सा है . जन सेना पार्टी के बाद बीजेपी इस साझा सरकार में तीसरा पर सबसे छोटा दल है. दक्षिण के इस राज्य में बीजेपी का संगठन पड़ोस के अन्य राज्य तेलंगाना की तुलना में बहुत छोटा है. कुछ महीने पूर्व पार्टी आला कमान ने इस राज्य में अपने संगठन का विस्तार करने और इसे मजबूत बनाने का निर्णय किया था. . सबसे पहले पार्टी के एक बड़े नेता पी.वी.एन. माधव को राज्य पार्टी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया . इनको लक्ष्य दिया गया कि आने वाले महीनों में पार्टी का विस्तार करने के साथ साथ इसे मज़बूत भी बनाना है।
इस दिशा में पहले और बड़े कदम के रूप में पार्टी की राज्य ईकाई ने “अटल -मोदी सुशासन यात्रा” निकालने का निर्णय किया . यह यात्रा दो चरणों में 11 और 25 दिसम्बर को आयोजित की गई . यात्रा के अंत में अमरावती में एक बड़ी सभा का आयोजन भी किया गया जिसमें तेलुगु देशम पार्टी तथा जन सेना पार्टी के कई बड़े नेताओं ने भाग लिया . दोनों दल एन. डी. ए . का हिस्सा हैं।
चूँकि केंद्र में बीजेपी के पास अपना बहुमत नहीं है इसलिए मोदी सरकार तेलुगु देशम पार्टी के 16 सांसदों और बिहार के सत्तारूढ़ दल जनता दल(यूनाइटेड ) के 12 सांसदों के समर्थन पर टिकी हुई है . इसके चलते बीजेपी इन दोनों दलों को नाराज होने का कोई मौका नहीं देना चाहती . इसलिए इस सभा में इन दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया , जबकि शुद्ध रूप से यह बीजेपी का आयोजना था।
2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन से बने तेलंगाना में बीजेपी की स्थिति बेहतर है . यहाँ से पार्टी को लोकसभा तथा विधानसभा में काफी सीटें मिली थी . हाल ही में वहां हुए पंचायत राज संस्थायों के चुनावों में पार्टी पहले से कहीं अधिक सीटें जीतने में सफल रही . जबकि आंध्र प्रदेश में इस तुलना में पार्टी कमजोर है। इसलिए दक्षिण में अपनी उपस्थिति को मजबूत बनाने के लिए आब आंध्र प्रदेश में भी पार्टी को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद राज्य में लोकसभा तथा विधान सभा के हुए चुनाव बीजेपी ने तेलुगु देशम पार्टी के साथ मिलकर लडे थे . इन चुनावों में बीजेपी को काफी लाभ भी हुआ . उस समय जन सेना पार्टी ने बाहर रह कर बीजेपी का समर्थन किया था . इसके चलते बीजेपी लोकसभा की दो तथा विधानसभा की 4 सीटों पर जीतने में सफल रही . पार्टी को लोकसभा चुनावों में 7.22 प्रतिशत वोट मिले. वहीं विधानसभा चुनावों में यह आंकड़ा 4.13 प्रतिशत था . बाद में मतभेदों के चलते तेलुगु देशम पार्टी एन . डी. ए . से अलग हो गई . 2019 के लोकसभा तथा विधान सभा चुनाव इन दोनों ने अलग अलग रूप से लडे . पर इन चुनावों में दोनों दलों को भारी नुकसान हुआ . जगन मोहन रेड्डी ने नेतृत्व वाले वाई एस आर कांग्रेस पार्टी ने इन चुनावों इन दोनों दलों का सफाया सा कर दिया . इन दोनों चुनावों में बीजेपी एक भी सीट पर जीत नहीं पाई .इसको मिले मत एक प्रतिशत से भी कम थे।
लेकिन 2024 के विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों में ये तीनों दल फिर एक मंच आ गए . यह गठबंधन सत्ता में आने में सफल रहा . बीजेपी ने लोकसभा की कुल 6 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से यह 3 सीटें जीतने में सफल रही . इसी प्रकार विधान सभा सीटों के बंटवारे में बीजेपी को 10 सीटें मिली . इनमें से यह 8 स्थानों में जीतने सफल रही. बीजेपी को लोकसभा चुनावों में 11.28 प्रतिशत मिले वहीं विधान सभा चुनावों इसे 2.83 प्रतिशत वोट मिले . पार्टी का एक विधायक सत्य कुमार यादव कैबिनेट मंत्री बनाया गया . ऐसा बताया है बीजेपी वर्तमान सरकार के कार्यों से पूरी तरह खुश नहीं है . लेकिन इसके नेता इसको लेकर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं करने के बचते ताकि साझा सरकार में मतभेद पैदा ना हों .. लेकिन इसके साथ ही बीजेपी के नेता चाहते है कि राज्य में पार्टी का विस्तार हो . पर इस बात की होशियारी बरती जा रही है . लेकिन भीतर खाने दोनों बड़े दल सतर्क भी है . उनको लगता है बीजेपी राज्य में अपनी स्थिति को मजबूत कर साझा सरकार में अपना वज़न बढाने की कोशिश कर सकती है। (लेखक के अपने विचार हैं)

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