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मुंबई। हॉस्पिटल सेक्टर में सिर्फ बड़ा नेटवर्क होना ही तरक्की की पहचान नहीं है, बल्कि यह भी उतना ही अहम है कि वहां कितनी जटिल और एडवांस इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसी सोच के साथ पारस हेल्थकेयर ने अपने क्लिनिकल मॉडल को छह हाई-एक्युटी स्पेशियलिटीज़ पर तैयार किया है। इनमें कार्डियक साइंसेज़, ऑन्कोलॉजी, न्यूरोसाइंसेज़, गैस्ट्रो साइंसेज़, ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पोर्ट्स इंजरी और रीनल साइंसेज़ शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर कॉनगोर कहा जाता है। ये सभी स्पेशियलिटीज़ कंपनी की टर्शियरी केयर और क्वाटरनरी केयर रणनीति की रीढ़ हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कंपनी के ऑपरेशंस से होने वाली कुल आय में इनकी हिस्सेदारी लगातार 70% से अधिक रही है। कंपनी की आय का बंटवारा भी इसी रणनीति को साफ तौर पर दर्शाता है। वित्त वर्ष 2026 में कॉनगोर स्पेशियलिटीज़ से 11,996.35 मिलियन रुपये की आय हुई, जो ऑपरेशंस से होने वाली कुल आय का 74.70% थी। इनमें ऑन्कोलॉजी सबसे बड़ा योगदान देने वाली स्पेशियलिटी रही, जिसकी हिस्सेदारी 21.63% रही। इसके बाद न्यूरोसाइंसेज़ (13.03%), कार्डियक साइंसेज़ (12.78%), ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पोर्ट्स इंजरी (10.75%), गैस्ट्रो साइंसेज़ (8.30%) और रीनल साइंसेज़ (8.21%) का स्थान रहा।