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ताला (जयपुर)। समाज सेवी मुहम्मद जाहिद गुड़एज़ ने कहा की ताला ग्राम की ऊँची डूँगरी पर विराजमान हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत बुर्रहानुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला आलेह के दीवाने रंजो गम से मुरझाया नहीं करते है।
यह शब्द गुड़एज़ ने ग्राम ताला में बाबा के उर्स में जायरीनों को सम्बोधित करते हुए कहे। गुड़एज़ ने कहा की इरादे रोज बनकर टूट जाते हैं ताला में वही जाते हैं जिन्हें बाबा बुलाते हैं।
गुड़एज़ ने कहा यह वो दर है जहां पर बादशाहों व मंत्री से लेकर संतरी तक अपनी फरियाद लेकर आते रहते हैं और खुदा बाबा के आए हुए जायरीनों की लाज रखता है इसलिए तो लोग कहते हैं कि बाबा के दीवाने रंज ओ गम से मुरझाया नही करते हैं। उन्होंने बाबा की छत के लिए 5 लाख रुपए देने की भी घोषणा की।
समाज सेवी ज़ाकिर खान गुड़एज़ ने कहा कि हद तपे सो औलिया बे हद तपे सो पीर, हद बे हद तपे ताको नाम फकीर। दरगाह के ख़ादिमों ने कहा कि बाबा के दरबार मे जो भी आता है वह खाली हाथ नही जाता है खादिमों ने भारत देश की तरक़्क़ी के लिए दुआएं करवाई इससे पूर्व उनकी दस्तारबंदी की गई। ताला के नदीम खान शेख़ व सूफ़ी अब्दुल रज्ज़ाक खान शेख़ ने बताया कि इस अवसर पर उनके साथ मे आए हुए लोगो की भी दस्तारबंदी की गई।