राजस्थान हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

ठेके संबंधी विवादों में वैकल्पिक उपाय अपनाने पर जोर
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जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर के न्यायाधीश समीर जैन ने S.B. Civil Writ Petition No.10651/2026, Vprpl-Ksipl Bkn JV बनाम Union of India & Ors. में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जिन संविदात्मक विवादों में तथ्यों का विस्तृत परीक्षण आवश्यक हो और अनुबंध में प्रभावी वैकल्पिक विवाद-निवारण व्यवस्था उपलब्ध हो, उनमें हाईकोर्ट की रिट क्षेत्राधिकार का सामान्यतः प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
मामला बीकानेर रेलवे स्टेशन के मेजर अपग्रेडेशन से संबंधित लगभग ₹382.42 करोड़ के EPC Contract से जुड़ा था। अनुबंध को धीमी प्रगति के आधार पर समाप्त किया गया था। एडिशनल सॉलिसिटर जर्नल भारत व्यास ने भारत सरकार की ओर से सशक्त पैरवी करते हुए कोर्ट को बताया कि ऐसे गंभीर तथ्यात्मक एवं संविदात्मक विवादों का अंतिम निर्धारण रिट याचिका में करना उचित नहीं है और संबंधित पक्ष को अनुबंध में उपलब्ध प्रभावी वैकल्पिक उपाय का सहारा लेना चाहिए। कोर्ट ने इसी आधार पर रिट याचिका में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया
ये निर्णय , NHAI, PWD, CPWD एवं अन्य सरकारी विभागों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे contractual disputes में रिट क्षेत्राधिकार की सीमाएं स्पष्ट होती है |
*कानूनी क्षेत्र में यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि Article 226 की extraordinary jurisdiction को सामान्य contractual adjudication का विकल्प नहीं बनाया जा सकता, विशेषकर जब विवाद के समाधान के लिए प्रभावी वैकल्पिक मंच
निर्णय का व्यापक संदेश: सरकारी अनुबंधों से जुड़े विवादों में हाईकोर्ट रिट के माध्यम से सीधे contractual facts का विस्तृत पुनर्मूल्यांकन करने के बजाय पक्षकारों को अनुबंध में उपलब्ध प्रभावी वैकल्पिक विवाद-निवारण व्यवस्था का उपयोग करने के लिए निर्देशित कर सकता है। साथ ही, जहां तत्काल वित्तीय या संविदात्मक परिणाम गंभीर हों, न्यायालय वैकल्पिक remedy प्रभावी बनाने के लिए सीमित अंतरिम संरक्षण भी दे सकता है। (प्रेस नोट)

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