सीजफायर का सच

लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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सीज फायर ईरान और अमेरिका ने मिलकर नहीं किया बल्कि अमेरिका ने पाकिस्तान के द्वारा करवाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर को फोन करके कहा-ईरान से तुम्हारे अच्छे संबंध हैं इसलिए सीजफायर करवा दो क्योंकि अमेरिका को पता चल गया था कि उसने जो हमले किए हैं ईरान दुगनी ताकत से वापस हमले करेगा। उसने ईरान को कमजोर समझ कर हमला तो कर दिया पर जब ईरान की ताकत देखी तो वह खुद डर गया और पाकिस्तान द्वारा सीज फायर करवाया।
अमेरिका ने सीज फायर इसलिए करवाया ताकि वह युद्ध के दौरान हुए नुकसान का आंकलन कर सके, घायल सैनिकों का इलाज करवा सके और वापस युद्ध तैयारी कर सके। कोई सा भी देश हो सीज फायर के दौरान ऐसे ही तैयारी करता है कि दोबारा हमले होने पर दोगुनी ताकत से जवाब दिया जा सके। अमेरिका ने एक तरफ तो सीज फायर करवा दिया दूसरी तरफ इजराइल से लेबनान पर हमला करवा दिया और झूठ बोल गया कि हमला इजरायल ने किया है।
अमेरिका ने पाकिस्तान को मोहरा इसलिए बनाया ताकि विश्व में पाकिस्तान की छवि को मजबूत कर सके और पाकिस्तान की आवाम अपनी वर्तमान सरकार पर भरोसा कर सके कि हमारे देश की सरकार भी सीज फायर करवा सकती है। मोदी को अनदेखा कर दिया गया क्योंकि मोदी की तो एप्पस्टीन फाइल ट्रम्प के पास है उससे तो जब जो चाहे वह करवा सकता है। ठीक युद्ध के एक दिन पहले ट्रंप ने मोदी को इजराइल भेज दिया। पूरे देश की जनता इसका खामियाजा भुगत रही है। ट्रम्प के आदेश को टाला नहीं जा सकता था। ईरान से भी संबंध खराब हो गये। और मोदी की वैश्विक स्तर पर छवि भी खराब करनी थी वह पहले ही कह चुका था कि वह चाहे तो मोदी का राजनीतिक कैरियर बर्बाद कर सकता है। हुआ भी वही विश्व में भारत की फजीहत हुई और विश्व गुरु को अपनी सफाई में कुछ भी कहने का अवसर नहीं मिला। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)

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