अंधेपन के प्रकार और उनके शुरुआती लक्षण: डॉ. गणेश पिल्लई

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मुंबई। आंखों की रोशनी हमेशा अचानक नहीं जाती। आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाने वाली कई बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाकर प्रभावी इलाज किया जा सकता है। इसलिए समय पर बीमारी की पहचान और उचित उपचार बेहद जरूरी है। इसकी जानकारी डॉ. गणेश पिल्लई, चीफ एकेडमिक्स एंड रिसर्च (एएसजी) एवं रीजनल सीओओ (सेंट्रल रीजन), एएसजी हॉस्पिटल लिमिटेड ने दी। अंधेपन के प्रमुख प्रकार और उनके शुरुआती लक्षण: मोतियाबिंद: भारत में इलाज से ठीक किए जा सकने वाले अंधेपन का यह प्रमुख कारण है। आंख के प्राकृतिक लेंस में धुंधलापन आने से नजर कमजोर होने लगती है। सर्जरी से इसका इलाज संभव है। ग्लूकोमा (काला मोतिया): यह आंखों की नस को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है, जिससे नजर कमजोर हो सकती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी: खून में शुगर बढ़ने से आंख के पर्दे (रेटिना) की छोटी नसों को नुकसान पहुंच सकता है। आगे चलकर आंखों के सामने धब्बे दिख सकते हैं और नजर धुंधली हो सकती है। उम्र से जुड़ा मैक्युलर डिजनरेशन (एएमडी): इसमें सीधी रेखाएं टेढ़ी या लहरदार दिखाई दे सकती हैं। रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा: यह आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें सबसे पहले रात के समय देखने में परेशानी हो सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे देखने का दायरा सिमटने लगता है।

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