14 नवंबर बाल दिवस पर विशेष
लेखक : वेदव्यास
लेखक साहित्य मनीषी एवं वरिष्ठ पत्रकार हैं
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नन्हे-मुन्ने वीर जवाहर, अमन चैन के राही हैं।
हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख ईसाई, हम सब भाई-भाई हैं।।
कांटों में खुशियों के फूल खिलाये हैं
आंधी-तूफानों में दीप जलाये हैं
कदम बढ़े जिस ओर जिंदगी गाती है
नई भोर की नई किरण मुस्काती है
सूरज चांद सितारे जग के, नन्हे निडर सिपाही हैं।
हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख ईसाई, हम सब भाई-भाई हैं।।
गंगा की लहरें गाथाएं गायेंगी
हिम से ढकी वादियां शीश झुकायेंगी
सपनों का मधुमास धरा पर आयेगा
देश-देश के लिये ढाल बन जायेगा
हम भारत के गौतम-गांधी, नवयुग की तरुणाई हैं।
नन्हे-मुन्ने वीर जवाहर, अमन चैन के राही हैं।।
पंचशील की विजय पताका फहरेगी
द्वार-द्वार पर नई चेतना लहरेगी
जन-जन के स्वर में गीता का गान है
चंदन-सी माटी ये हिन्दुस्तान है
नन्हे-मुन्ने वीर जवाहर, अमन-चैन के राही हैं।
हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख ईसाई, हम सब भाई-भाई हैं।।
(लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)