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मुंबई। भारत का बिजली बाज़ार नए दौर में प्रवेश कर रहा है। भौतिक बिजली बाज़ार (फिजिकल पावर मार्केट) से जुड़े वित्तीय ढांचे के विकसित होने से कीमत तय करने, हेजिंग, निवेश और जोखिम प्रबंधन के नए अवसर उभर रहे हैं। एमसीएक्स की रिपोर्ट, ‘बिजली वायदा की समझ: डेटा, बाज़ार और कारोबार (ट्रेडिंग)’ से यह बदलाव रेखांकित होता है और स्पष्ट होता है कि बिजली वायदा (इलेक्ट्रिसिटी फ्यूचर्स), बाज़ार के प्रतिभागियों को कीमतों की अनिश्चितताओं से निपटने और बाज़ार में अधिक पारदर्शिता तथा दक्षता लाने में मदद कर सकता है। इस संदर्भ में, बिजली वायदा महत्वपूर्ण वित्तीय आधार प्रदान करते हैं। एमसीएक्स ने पिछले साल 10 जुलाई को मासिक बेस-लोड बिजली वायदे लॉन्च किए, जिससे बिजली के लिए जोखिम कम करने योग्य फॉरवर्ड कीमत तय हुई। ये अनुबंध संबंधित महीने के दौरान ‘डे-अहेड मार्केट’ की औसत कीमत के आधार पर नकद में सेटल होते हैं। इससे सेटलमेंट कीमत के जरिए भौतिक और वित्तीय बाजार आपस में जुड़ते हैं। इस तरह, बाजार प्रतिभागी वित्तीय साधनों का इस्तेमाल कर अपनी भौतिक पोज़ीशन को हेज कर सकते हैं। वायदे में 50 एमडब्ल्यूएच की ट्रेडिंग यूनिट और ₹1/एमडब्ल्यूएच का टिक साइज़ होता है।