3 साल के सलार और 5 साल की ज़ैनब भी बने नन्हे दानवीर

10 साल के हबीबुर्रहमान ने गुल्लक तोड़कर लगवाए परिंडे
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। आजकल के बच्चे जन्मदिन पर मोबाइल, साइकिल, वीडियो गेम मांगते हैं। पर मनोहरपुर में 10 साल के हबीबुर्रहमान उर्फ कबीर ने अपने जन्मदिन पर जो मांगा, उसने बड़ों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
गुल्लक टूटी, इंसानियत जुड़ी
जन्मदिन के दिन सुबह-सुबह कबीर ने अपनी गुल्लक उठाई और मां से बोला, “अम्मी, आज केक नहीं काटना। इन पैसों से बाजार से परिंडे लाओ। गर्मी बहुत है, चिड़िया प्यास से मर जाएगी।” ये सुनते ही 3 साल के छोटे भाई सलार अली और 5 साल की बहन ज़ैनब भी अपनी-अपनी गुल्लक ले आए। तीनों ज़िद पर अड़ गए, “पहले परिंडे लगेंगे, फिर जन्मदिन मनाएंगे।”
पापा की आंखें नम, मोहल्ला हैरान
बच्चों की जिद देखकर वालिद पत्रकार जाफ़र लोहानी की आंखें भर आईं। बोले, “मैं तो सोच रहा था DJ बुलाऊं, केक मंगवाऊं। पर मेरे बच्चों ने मुझे जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखा दिया।” तुरंत बाजार से 11 मिट्टी के परिंडे मंगवाए गए। मोहल्ले की दीवारों, पेड़ों और छतों पर तीनों बच्चों ने खुद अपने हाथों से परिंडे बांधे और पानी भरा।
चिड़िया आई, दुआएं लाई
जैसे ही परिंडों में पानी भरा गया, गौरैया, कबूतर, मैना सब दाना-पानी चुगने आ गईं। 5 साल की ज़ैनब ताली बजाकर बोली, “देखो भैया, चिड़िया हमको थैंक्यू बोल रही है।” 3 साल का सलार तो परिंडे के पास बैठकर पहरा देने लगा, “कोई पानी गिराएगा नहीं।” पूरा मोहल्ला ये नजारा देखकर भावुक हो गया।
कबीर का पैगाम: जन्मदिन मनाओ, पर नेकी भी कमाओ
10 साल के बर्थडे बॉय कबीर ने कहा, “अल्लाह ने हमें सब दिया है। पर इन बेजुबानों के पास कौन है? अगर हर बच्चा अपने जन्मदिन पर एक परिंडा लगाए तो कोई परिंदा प्यासा नहीं मरेगा। ये मेरा आप सबसे वादा है, हर साल जन्मदिन पर 10 परिंडे लगाऊंगा।”
नन्हे फरिश्तों के 3 सबक
उम्र नहीं, सोच बड़ी होनी चाहिए
3 साल का सलार समझ गया जो बड़े नहीं समझे
खुशी बांटने से बढ़ती है
केक से ज्यादा सुकून परिंडे लगाने में आया
बेजुबान की सुनो
गर्मी में सिर्फ इंसान नहीं, हर जीव को पानी चाहिए।

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