
लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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लगभग सात दशक पूर्व राज्यों का पुनर्गठन हुआ था तब केरल वजूद में आया था। तमिलनाडु ,त्रावणकोर तथा मैसूर रियासतों के मलयालम भाषी इलाकों को मिलकर यह नया राज्य बनाया गया था. उस समय इस नए बने राज्य के नाम को लेकर कई सुझाव आये थे लेकिन सर्व सम्मत इसे केरल नाम देना तय किया गया था। तब से इंग्लिश, हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में इसे केरल लिखा और कहा जाता है। लेकिन केरल की भाषा मलयालम में इसे हमेशा ही केरलम ही लिखा जाता रहा है। पिछले कुछ समय से यह माँग उठ रही थी कि राज्य का नाम कानूनी रूप से केरलम कर दिया जाये।
2023 में राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित एक प्रस्ताव के जरिये केंद्र सरकार से यह मांग की कि राज्य का नाम बदलकर केरलम कर दिया जाये। लेकिन इस प्रस्ताव में कुछ कानूनी खामियां पाई गई . केंद्र ने राज्य सरकार को कहा कि इन खामियों को दूर करके नया प्रस्ताव पारित करके भेजा जाये . इसलिए 2024 में एक बार फिर प्रस्ताव पारित करके केंद्र को भेजा गया . इसमें पहले की सभी खामियों को दूर कर दिया गया था . राज्य में विधान सभा के चुनाव सिर पर इसलिए हर पार्टी यह श्रेय लेना चाहती है कि नाम परिवर्तन उनके कारण हुआ है .कुछ महीने पहले राज्य बीजेपी के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख यह मांग की थी कि नाम परिवर्तन में अधिक विलम्ब नहीं किया जाना चाहिए . दिल्ली में जब प्रधानमंत्री के नए कार्यालय “सेवा तीर्थ” में मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई उसमें विधिवत रूप से केरल का नाम बदल केरलम करने का निर्णय किया गया . मंत्रिमंडल के इस फैसले को राष्ट्रपति के पास भेजा गया . कानूनी तथा संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार केंद्र सरकार कानूनी प्रावधानों पर आधारित एक विधेयक का प्रारूप राज्य सरकार को भेजेगी . राज्य विधानसभा इसे पारित कर केंद्र को भेजेगी . फिर इस पर संसद की मंजूरी ले जायेगी इसके बाद ही केरल का नया नाम केरलम हो जायेगा . इस सारी प्रक्रिया को पूरा करने में समय लग सकता है . इसलिए इस बात की संभावना कम है कि चुनावों से पूर्व यह काम पूरा हो जायेगा . चुनाव अभियान के दौर सभी दल इस नाम परिवर्तन की बात करेंगे तथा दावा करेंगे कि यह उनके प्रयासों के चलते हुआ है।
केरल और केरलम नाम की उत्त्पति को लेकर इतिहासकारों की अलग अलग राय है . राज्य में पाए गए सम्राट अशोक काल के शिलालेखों में “ केरल पुत्र “ का उल्लेख . पर कुछ में इसे केरलम भी लिखा गया है।
आज़ादी के बाद ऐसा पहली बार नहीं ही हो रहा है कि किसी राज्य अथवा शहर का नाम बदला गया हो। इसको लेकर विवाद भी हुए . केरल पर केंद्र सरकार ने निर्णय के निर्णय के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार इसको लेकर राजनीति कर रही है . उनकी सरकार ने लगभग 8 वर्ष पूर्व विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करवा कर यह माँग की थी कि राज्य का नाम पश्चिम बंगाल से बदल कर “बोंगाल” कर दिया जाये लेकिन केंद्र सरकार ने इस को लेकर कोई कार्यवाही नहीं की। यहाँ उल्लेख करना जरूरी है कई वर्ष पूर्व राज्य सरकार ने कलकत्ता का नाम बदल कर कोलकत्ता करने का प्रस्ताव् केंद्र को भेजा था और उसे बिना किसी विलम्ब के स्वीकार भी कर लिया गया था। इसी बीच दिल्ली के कुछ बीजेपी नेताओं ने मांग की है कि दिल्ली का नाम बदलकर इन्द्रप्रस्थ कर दिया जाये। इस नाम का उल्लेख महाभारत में मिलता है।
आज़ादी के बाद कई राज्यों तथा शहरों के नाम बदले गए। आज़ादी के कुछ साल बाद तक तमिलनाडु का नाम मद्रास था। राज्य की राजधानी का नाम भी मद्रास था . राज्य का नाम तमिलनाडु और राज्य की राजधानी का नाम चेन्नई कर दिया गया। केरल में राजधानी का पुराना नाम त्रिवेंद्रम से बदलकर थिरुवनथ्पुरम कर दिया गया।
मुम्बई का पुराना नाम बदलकर मुंबई कर दिया गया। जब उत्तर प्रदेश का विभाजन कर नया राज्य बना तो उसका नाम उत्तरांचल रखा गया था जो बाद में बदल कर उत्तराखंड कर दिया गया . इन बदलावों को लेकर कोई विशेष विवाद नहीं हुए। लेकिन जब उत्तर प्रदेश की योगी साकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने का निर्णय किया तो इसको लेकर बड़ा बवाल हुआ. यह आरोप लगाया गया कि बीजेपी सरकार मुस्लिम बादशाहों के काल से चले आ रहे सभी मुस्लिम नाम बदलने पर तुली हुई है। उधर महाराष्ट्र में औरंगाबाद का नाम बदल कर संभाजी नगर कर दिया गया। (लेखक के अपने विचार हैं)