दक्षिण के दो राज्यों में सरकारें बदलीं

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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हाल ही में चार राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश के विधान सभायों के चुनावों के दौरान राज्नीतिक नेताओं से लेकर आम राजनीतिक रूप से जागरूक लोगों की सबसे अधिक नज़र पश्चिम बंगाल पर टिकी हुई थी। तक़रीबन सभी चुनावी सर्वेक्षण तथा एग्जिट पोल यह बता रहे थे कि पूर्व भारत के इस राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है। बहुत लोग यह मान कर चल रहे थे कि टी एम् सी की नेता ममता बनर्जी को चौथी बार सत्ता में आने से रोकना बहुत कठिन है। लेकिन आखिर में वहां बीजेपी सत्ता में आई और वह भी भारी बहुमत से। पश्चिम बंगाल के चुनावों के चलते दक्षिण के तीन राज्यों में हो रहे चुनाव उतनी सुर्खिया नहीं बटोर पा रहे थे जितनी की होनी चाहिए थी। इन तीन राज्यों में से -तमिलनाडु को छोड़ कर, केरल तथा पुदुचेरी, के चुनावों के नतीजे चुनावी सर्वेक्षण के अनुसार ही आये। तमिलनाडु के बारे में यह माना जा रहा था कि वहां सत्तारूढ़ द्रमुक और इसके गठबंधन प्रगतिशील लोकतान्त्रिक अलायन्स का फिर सत्ता में आना लगभग तय है। यहाँ दो साल पहले बनी एक नई पार्टी टी.वी.के. के बारे में कहा जा रहा था कि वह 10 -20 प्रतिशत मत लेकर 15-20 सीटों पर सिमट जायेगी। असली मुकाबला द्रमुक के गठबंधन, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है और अन्नाद्रमुक, जिसमे बीजेपी भी शामिल है, की बीच रहेगा। लेकिन दक्षिण के इस द्रविड़ राज्य ने सभी अनुमानों को धत्ता बता दिया तथा तथा टी वी. को सत्ता की दहलीज़ पर पहुंचा दिया .
केरल में नवम्बर में हुए स्थानीय तथा पंचायत राज सस्थायों के हुए चुनावों में तब सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नीत वाम लोकतान्त्रिक मोर्चे को भारी नुकसान हुआ था तथा कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतान्त्रिक मोर्चे ने बड़ी जीत दर्ज की थी। तभी से लग रहा था कि विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चे को हार का सामना करना पड़ सकता है। इस राज्य की दो ध्रुवीय राजनीति में वाम मोर्चा तथा कांग्रेस नीत मोर्चा हर पांच साल बाद बारी बारी से सत्ता में आते रहे हैं। लेकिन 2021 में वाम मोर्चे ने इस क्रम को तोड़ दिया तथा लगातार दूसरी बार सत्ता में आया। इससे पहले 2024 में कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में कुल 20 में से 18 सीटें जीत लीं थीं। तभी यह लग रहा था कि 2026 के विधानसभा के चुनावों में वाम मोर्चा हार सकता है। इन चुनावों में कांग्रेस वाले मोर्चे ने 140 सीटों में से 102 सीटें जीती। जिसमें अकेले कांग्रेस की 63 सीटें हैं। इसके सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 22 सीटें मिलीं। वाम मोर्चे को पिछले चुनावों से लगभग आधी सीटें ही मिलीं।
पुदुचेरी में कुल 30 सीटें है। पिछले चुनावों में यहाँ रंगासामी कांग्रेस और बीजेपी ने मिल कर बहुमत पाया था। इस गठबंधन को कुल 16 सीटें मिली थी। इस बार इस गठबन्धन को 18 सीटें मिली। तमिलनाडु से सटते इस केंद्र शासित प्रदेश में वहां की राजनीति का बड़ा प्रभाव है। कभी यहाँ द्रमुक और अन्नाद्रमुक का दबदबा था। इन चुनावों में द्रमुक को 5 सीटें मिली तथा टी. वी के. को दो सीटें ही मिली।
अब फिर लौटते है तमिलनाडु की नतीजों पर। लगभग दो साल पहले राज्य बड़े फिल्म अभिनेता सी. विजय जोसफ, जिन्हें उनके चाहने वाले थलपति (राजा) के नाम से संबोधित करते है, ने राजनीति में प्रवेश करने की घोषणा की। उन्होंने टी.वी के. नाम से एक नया राजनीतिक दल बनाया तथा घोषणा की उनका दल राज्य विधान सभा चुनावों में मैदान में उतरेगा।उन्होने बड़ी रैलियां की।
उन्होंने बार बार दोहराया का कि उनका दल अकेला ही चुनाव लडेगा। उनका दल न तो द्रमुक और न ही अन्नाद्रमुक की नीतियों पर चलेगा। उनका दल जाति वाद को खत्म करेगा और धर्मनिरपेक्षता की नीति पर चलेगा। उनके चाहने वालों ने हर शहर क्लब बना रखे है। ये क्लब ही इस नई पार्टी के दफ्तर के रूप में तब्दील हो गए। चुनावों के दौरान उन्होंने केवल 2 बड़ी सभायों को संबोधित किया जिनमें वे केवल 35 मिनट बोले। उनका सारा का सारा चुनावो अभियान सोशल मीडिया तथा डिजिटल मीडिया के जरिये चलाया गया। उन्होंने खुद दो सीटों से चुनाव लड़ा तथा दोनों जगह जीते। इस पार्टी की आंधी का अनुमान इससे से लगाया जा सकता कि द्रमुक के सुप्रीमो तथा राज्य के मुख्यमंत्री रहे एम .के स्टालिन भी अपने क्षेत्र से चुनाव क्षेत्र से चुनाव हार गए। पार्टी को कुल मिलकर 234 सदस्यों वाली विधानसभा में 108 सीटें मिली जो बहुमत से कुछ कम थीं। उन्होंने तय किया कि बहुमत पाने के लिए न तो वे द्रमुक और न भी अन्नाद्रमुक समर्थन लेगें। वे कांग्रेस सहित, जिसे 5 सीटें मिली है, कुछ अन्य छोटे दलों के समर्थन से अपनी सरकार बनायेंगे। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)

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