
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ (राजस्थान)
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श्री सांवरिया जी राजकीय जिला चिकित्सालय दिनांक 20 मई 2026 को रात्रि 11:00 बजे चिकित्सालय लाया गया ऑन ड्यूटी डॉक्टर ने उनकी जांच पड़ताल करके भर्ती कर लिया और और सुबह लगभग साढ़े 10 से 11बजे के बीच में सिजेरियन ऑपरेशन की बात कही। 10:30 से 11 बजे के बीच उनका सिजेरियन ऑपरेशन निर्धारित था। सुबह आपरेशन के समय किसी अन्य डॉक्टर की ड्यूटी थी, लेकिन डॉ. दीप्ति अपने कार्य से निवृत्त हो चुकी थी। शिष्टाचार वश उन्होंने ड्यूटी डॉक्टर से ऑपरेशन करने की अनुमति मांगी, जिस पर सहमति दे दी गई। इसके बाद सुबह लगभग 10:30 से 11 बजे के बीच सिजेरियन किया गया। सिजेरियन शुरू करने से पहले तक बच्चे की धड़कनें चल रही थी। बताया गया कि सिजेरियन कुशलता से हुआ लेकिन बच्चे की गर्भ में ही अज्ञात कारण से मौत हो चुकी थी। लेकिन परिजनों ने आक्रोशित होकर अस्पताल में ही विरोध शुरू कर दिया और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि स्टाफ और चिकित्सक की लापहरवाही से बच्चे की मौत हुई है। लेकिन सम्बन्धित चिकित्सक का कहना है कि आपरेशन बिल्कुल तय समय पर किया गया। भीड़ का मनोविज्ञान कहता है कि जब कुछ लोग किसी बात पर हंगामा कर रहे होते हैं तो कुछ दूसरे लोग बिना सच्चाई जाने शामिल हो जाते हैं। अक्सर ऐसा ही होता है।जिसका खामियाजा चिकित्सक व चिकित्सालय प्रशासन को भुगतना पड़ता है। आम आदमी को अपनी मानसिकता बदलनी होगी। कोई भी चिकित्सक यह नहीं चाहेगा कि मरीज की मौत हो जाए। अंतिम सांस तक भरसक प्रयास करते हैं। जन्म मरण ईश्वर के साथ होता है लेकिन गरिमा पूर्ण पद पर बैठे हुए पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर इस प्रकार उनका अपमान करना ठीक नहीं है। (लेखिका के अपने विचार है )