धर्मो रक्षति रक्षितः

लेखक : रमेश जोशी (व्यंग्यकार)
प्रधान सम्पादक, ‘विश्वा’, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, यू.एस.ए.
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आज तोताराम बहुत खुश था, बोला- देखा, ऐसे धर्म अपनी रक्षा करने वाले की रक्षा करता है। आखिर ‘ट्रम्प’ की जान बच ही गई।
हमने कहा- तोताराम, क्या अब फिर किसी ने संत शिरोमणि ट्रम्प पर प्राणघातक हमला कर दिया? जुलाई 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान हमला, अप्रैल 2026 में कोरसपोन्डेंट्स डिनर के समय हमला और अभी मई में व्हाइट हाउस के सामने फिर गोलीबारी। वास्तव में इस दुनिया में भले लोगों का तो जीना ही हराम है। ईसा मसीह को दुष्ट लोगों ने सूली पर चढ़ा दिया। महात्मा गाँधी, मुजीबुर्रहमान, भंडारनायके, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी जाने किन किन की हत्या कर दी गई।
बोला- मैं हत्या की बात नहीं कर रहा। मैं तो ईद के दिन बांग्ला देश में कुर्बानी से ‘ट्रम्प’ को बचा लिए जाने की बात कर रहा हूँ।
हमने कहा- यह ठीक है हमारे यहाँ नर बलि के कई प्रसंग आते हैं। खलीफा ने भी अल्लाह के लिए अपने बेटे की बलि दी थी लेकिन जैसा कि ऐसे मामलों में होता है तलवार किसी और पर चल गई और खलीफा का बेटा बच गया। हमारे यहाँ भी कुछ दुष्ट लोग महात्मा गाँधी की हत्या को ‘वध’ कहते हैं जो कि एक प्रकार से महान पुण्य कार्य माना जाता है। हिन्दू महासभा की एक नेता शकुन पांडे ने तो बाकायदा गाँधी के पुतले पर गोली चलाते हुए फ़ोटो खिंचवाकर अपने इरादों का परिचय दिया था। इसी तरह से हिन्दू महासभा से विनायक सावरकर द्वारा सहायता प्राप्त गोडसे के पत्र में एक कार्टून में गाँधी को दस सिर वाला ‘रावण’ बनाकर श्यामाप्रसाद मुखर्जी और सावरकर द्वारा उस पर तीर चलते हुए दिखाकर अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए थे।
लेकिन ट्रम्प को किसने पकड़कर बांग्लादेश पहुँचा दिया? ईरान से तो ऐसा समाचार आया नहीं और न ही ट्रम्प इन दिनों बांग्लादेश की यात्रा पर हैं कि किसी पशु विक्रेता ने उन्हें भैंसा समझकर पकड़कर किसी कसाई को बेच दिया। हालाँकि जिस तरह से उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर मंगवा लिया और अब उसका तेल भारत जैसे अपने आज्ञाकारी देशों को बेचने वाले हैं और भारत के उद्योगपति यहाँ निवेश करके बेकारी कम करने की बजाय अमेरिका में निवेश कर रहे है, उससे तो ट्रम्प दुनिया में इस समय महिषासुर कीतरह किसी बिगड़ैल भैंसे वाली भूमिका ही निभा रहे हैं।
वैसे भारत में तो मुसलमानों ने ईद के मौके पर अपने को विवादों से परे रखने की समझदारी दिखाई है गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने का नारा देकर और पशुपालकों से गाय न खरीदकर।
बोला- मास्टर, तू मेरी बात सुने बिना ही बात को अपने अनुसार रँग कर बढ़ाए चला जा रहा है। यह अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रम्प नहीं बल्कि 700 किलो का एक एलबीनो भैंसा है जिसके बाल भूरे हैं और रंग भी काला नहीं है।
हमने कहा- यह तो बीमारी है। कई ऐसे बच्चे भी होते हैं जिनकी चमड़ी बहुत गोरी सी हो जाती है और बाल भी सफेद या सुनहरे और आँखें दिन में ढंग से नहीं देख पातीं। यह एक प्रकार का विकार है । मनुष्यों की तरह जानवरों में भी विकार हो जाते हैं । ये जन्मजात होते हैं और ठीक होना बहुत मुश्किल है।
अपंग मनुष्य और बीमार जानवर की कुर्बानी जायज नहीं है। हो सकता है शरीर की तरह दिमाग में भी कोई खराबी आ गई हो। अच्छा हुआ जो ‘ट्रम्प’ की कुर्बानी नहीं दी । ऐसे जानवर को खाकर जाने कितने लोग जिस्मानी और दिमागी तौर पर बीमार हो सकते थे। सरकार ने भी अच्छा ही किया जो उस भैंसे को चिड़ियाघर में भेज दिया लेकिन 700 किलो की कोई चिड़िया होती है क्या?
इसे तो सूअरों में बाड़े में रखना चाहिए था।
फिर भी चलो अच्छा ही हुआ। अगर अपने इस ‘भावना प्रधान देश’ में ऐसा हुआ होता तो इस ईद पर गाय की कुर्बानी से बच निकले मुसलमानों को मोदी जी के मित्र की कुर्बानी के अर्द्ध सत्य ‘ट्रम्प हतो नरो वा भैंसो वा’ को लेकर दंगा करवा देते। (लेखक के अपने विचार हैं)

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