महिला सशक्तिकरण की दिशा में गोपाल किरन समाजसेवी संस्था की पहल

सिरौली में स्वयं सहायता समूहों का उन्मुखीकरण एवं क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित
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ग्वालियर। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS) द्वारा ग्राम पंचायत सिरौली, विकासखंड मुरार, जिला ग्वालियर में स्वयं सहायता समूहों के उन्मुखीकरण एवं क्षमता संवर्धन विषय पर एक प्रभावी बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर समूह संचालन, वित्तीय प्रबंधन, आजीविका संवर्धन, सरकारी योजनाओं तथा सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MPSRLM) के सहायक विकासखंड प्रबंधक श्री ब्रजेश सिंह जादौन, गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे, संस्था के स्वयंसेवक श्री मूलचंद, तथा UPES, देहरादून से इंटर्नशिप कर रहे दिव्याना मिश्रा, प्रियांशु एवं काव्या त्रिपाठी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बैठक की शुरुआत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के परिचय एवं संवाद से हुई। माँ ज्वाला देवी सरस्वती स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती नीतू जाटव ने समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों, मध्याह्न भोजन संचालन, महिलाओं की भागीदारी तथा वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अन्य समूहों की महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए आजीविका, बैंकिंग, ऋण सुविधा तथा रोजगार के अवसरों पर चर्चा की।
संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं नेतृत्व विकास का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि गोपाल किरन समाजसेवी संस्था ने उस समय मुरार विकासखंड में स्वयं सहायता समूहों की अवधारणा को जमीनी स्तर पर लागू करना प्रारंभ किया था, जब अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस व्यवस्था से परिचित भी नहीं थे। संस्था ने बिना किसी बाह्य परियोजना के गाँव-गाँव जाकर महिलाओं को संगठित किया, बचत की संस्कृति विकसित की और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया। आज भी संस्था उसी प्रतिबद्धता के साथ क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समूहों की नियमित बैठक, पारदर्शी लेखा-जोखा, बैंक से सतत संपर्क, आयवर्धन गतिविधियाँ तथा सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ उठाना प्रत्येक समूह की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 1 जुलाई से लागू नई ग्रामीण विकास व्यवस्थाओं में स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों की भूमिका और प्राथमिकता को और अधिक महत्व दिया जा रहा है, जिसका लाभ प्रत्येक पात्र महिला तक पहुँचना चाहिए।
सहायक विकासखंड प्रबंधक श्री ब्रजेश सिंह जादौन ने समूहों के अभिलेख संधारण, बैठक रजिस्टर, बचत एवं ऋण प्रबंधन, बैंकिंग प्रक्रिया, वित्तीय अनुशासन तथा समूह संचालन की तकनीकी जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित रिकॉर्ड और नियमित बैठकें किसी भी स्वयं सहायता समूह की सफलता की आधारशिला होती हैं।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने खुलकर अपनी समस्याएँ और सुझाव रखे। संस्था द्वारा उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, स्वरोजगार, कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता एवं सामुदायिक नेतृत्व से संबंधित जानकारी भी प्रदान की गई।
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण सामाजिक विषय भी सामने आया कि ग्राम की अनेक बालिकाएँ आज भी नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा रही हैं। इस पर संस्था ने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए सभी अभिभावकों से अपनी बेटियों का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने तथा उनकी नियमित उपस्थिति बनाए रखने का आग्रह किया। संस्था ने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण की वास्तविक शुरुआत शिक्षा से होती है, इसलिए प्रत्येक बालिका को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि स्वयं सहायता समूहों को अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं संगठित बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता विकास तथा सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
गोपाल किरन समाजसेवी संस्था ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन, प्रशासन, स्वयं सहायता समूहों एवं समाज के सामूहिक सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर “सशक्त महिला – समृद्ध परिवार – आत्मनिर्भर समाज” के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है। (प्रेसनोट)

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