
विधायक के आश्वासन के तीन माह बाद भी नहीं बदले हालात
सुरेश बागड़ी की रिपोर्ट
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मण्डावर (दौसा)। नगर पालिका मण्डावर के गांव मण्डावर के लोगों को पिछले कई माह से गंभीर विद्युत संकट का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि पिछले कई दिनों से बिजली आपूर्ति 10 से 20 मिनट भी लगातार नहीं चल पा रही है। ओवरलोड के कारण बार-बार ट्रांसफॉर्मर और फीडर ट्रिप हो रहे हैं, जिससे दिन-रात अघोषित बिजली कटौती हो रही है। भीषण गर्मी और उमस के बीच लगातार बिजली गुल रहने से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनसे शहरी क्षेत्र के अनुसार बिजली बिल वसूला जा रहा है, जबकि बिजली आपूर्ति पिछले माह से ग्रामीण विद्युत फीडर के माध्यम से की जा रही है।
जानकारी के अनुसार करीब दो वर्ष पहले बांदीकुई-आगरा रेल दोहरीकरण परियोजना के दौरान गढ़ी सवाईराम-अलवर रेलवे फाटक के पास रेल पटरियों के नीचे से गुजर रही गांव मण्डावर की 11 केवी विद्युत लाइन की एक केबल क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद विद्युत विभाग ने क्षतिग्रस्त केबल को बदलने के बजाय दूसरी विद्युत लाइन से बिजली सप्लाई चालू कर दी गई। तीन माह पूर्व 2 मई को दूसरी विद्युत लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। जिसके बाद से विद्युत विभाग द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गांव मण्डावर को ऐदलपुर ग्रामीण विद्युत फीडर से जोड़ दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था कुछ समय के लिए की गई थी, लेकिन विभाग ने आज तक नई केबल नहीं डाली और अस्थायी व्यवस्था ही स्थायी बना दी। ग्रामीण फीडर से शहरी क्षेत्र को जोड़ने के कारण संबंधित 220 केवी जीएसएस पर अतिरिक्त भार पड़ने लगा है। इसके चलते जयपुर से बार-बार ओवरलोड (एलडी) का संदेश आता है। जैसे ही एलडी संदेश मिलता है, 33 केवी जीएसएस से जुड़े हल्दैना, ऐदलपुर, गढ़ी सवाई राम के, झालाटाला और खेड़ामंगल सिंह फीडरों की बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ती है। इसके साथ ही गांव मण्डावर की बिजली भी बाधित हो जाती है। नतीजतन न केवल मण्डावर, बल्कि इन सभी ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को भी लगातार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व जिला परिषद सदस्य रोशन हवलदार ने बताया कि गांव मण्डावर के लोग पिछले दो वर्षों से बिजली की आंख-मिचौली झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग आज तक 11 केवी लाइन की क्षतिग्रस्त केबल को नहीं बदल सका। उनका सवाल है कि जब उपभोक्ताओं को बिजली ग्रामीण फीडर से दी जा रही है तो उनसे शहरी दरों के अनुसार बिजली बिल क्यों वसूला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग उपभोक्ताओं के साथ अन्याय कर रहा है और समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
हवलदार ने बताया कि करीब तीन माह पहले महुवा विधायक राजेंद्र मीणा ने विद्युत विभाग एवं रेलवे अधिकारियों को पत्र लिखकर समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि नई केबल डालकर गांव को पुनः शहरी विद्युत फीडर से जोड़ दिया जाएगा, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। पिछले पांच दिनों में तो हालात और अधिक खराब हो गए हैं तथा बिजली 10 से 20 मिनट से अधिक लगातार नहीं चल पा रही है।
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि भीषण गर्मी और उमस के बीच लगातार बिजली कटौती के कारण लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। रातभर बिजली आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है। लोग गद्दे और तकिए लेकर छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं, लेकिन वहां भी गर्मी और मच्छरों से राहत नहीं मिल रही। बार-बार बिजली बाधित होने से पेयजल आपूर्ति, घरेलू उपकरणों और छोटे कारोबारों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उपभोक्ताओं ने बताया कि विद्युत विभाग के रिकॉर्ड में गांव मण्डावर नगर पालिका क्षेत्र का हिस्सा है और सभी उपभोक्ताओं से शहरी श्रेणी के अनुसार बिजली बिल लिया जाता है। इसके बावजूद उन्हें ग्रामीण फीडर से बिजली दी जा रही है, जो न केवल बार-बार बाधित होती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के अतिरिक्त भार का असर भी झेलना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था नियमों के विपरीत है और उपभोक्ताओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
ओवरलोड बना परेशानी की मुख्य वजह
जानकारी के अनुसार संबंधित जीएसएस से हल्दैना, ऐदलपुर,झालाटाला और खेड़ामंगल सिंह सहित चार ग्रामीण विद्युत फीडरों को बिजली आपूर्ति की जाती है। इनमें गांव मण्डावर को भी जोड़ दिए जाने से पूरे सिस्टम पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। ओवरलोड के कारण लगातार एलडी संदेश मिलने पर सुरक्षा की दृष्टि से 33 केवी आपूर्ति बंद करनी पड़ती है, जिससे सभी संबंधित फीडरों पर बार-बार बिजली गुल हो जाती है। इससे हजारों उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विद्युत विभाग शीघ्र नई केबल डालकर गांव मण्डावर को पुनः शहरी फीडर से नहीं जोड़ता और बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं किया जाता, तो क्षेत्र की जनता व्यापक जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। लोगों का कहना है कि अब उनका सब्र जवाब दे चुका है और वे स्थायी समाधान चाहते हैं।