‘स्वरमंजरी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन

सुनील जैन की रिपोर्ट
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जयपुर। सुर सप्तक के संयोजन में ‘स्वरमंजरी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभाशाली बच्चों एवं युवाओं ने शास्त्रीय संगीत, ग़ज़ल, तबला वादन तथा फिल्मी गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया। जयपुर में पहली बार आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम को दर्शकों ने भरपूर सराहना दी।
संस्था की संस्थापक डॉ. सुनीता शर्मा, निदेशक अतुल श्रीवास्तव, सह-निदेशक संजय सक्सेना एवं रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बाल एवं युवा प्रतिभाओं को एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करना है, जहाँ वे अपनी संगीत साधना और कला का प्रदर्शन कर सकें। कार्यक्रम में कराओके गायन, ग़ज़ल, शास्त्रीय राग, तबला वादन, सुर, भाव एवं अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम देखने और सुनने को मिला।
कार्यक्रम के संरक्षक पं. गिरेंद्र तलेगांवकर के मार्गदर्शन में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि माया रानी टाँक, विशिष्ट अतिथि प्रभावती अन्ने तथा सम्माननीय अतिथि चेतन स्वरूप श्रीवास्तव एवं देवेन सिन्हा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई तथा सभी प्रतिभागियों को आशीर्वाद एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।मंच संचालन सुरेखा मित्तल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में अनुपम सक्सेना, प्रशंसा श्रीवास्तव सहित संपूर्ण आयोजन समिति का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देने वाले प्रतिभागियों में लक्ष्मी नारायण (राग–शास्त्रीय गायन), ईशांत सक्सेना (तबला वादन), नित्यान्श त्रिवेदी (ग़ज़ल – अब छलकते हुए सागर नहीं देखे जाते), तनिष्क श्रीवास्तव (राग एवं तबला वादन), अद्विति वत्स (राग भीमपलासी), शानवी भटनागर (राग काफी एवं धूप), गर्वित (राग मेघ मल्हार), रजनी (घर मोरे परदेसिया), अनिका (ओ रे पिया), सक्षम (मन मेरा), वान्या (हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे हैं), दिव्या पारीक (ज़रा सी आहट होती है), बादल (बड़े अच्छे लगते हैं), ग्रेसी (सहारा तू तो बदला नहीं है), स्वस्ति झा (धीरे से आजा री अंखियों में), विशेष (ओ मेरी जान), कनिष्क (मुस्कुराने की वजह तुम हो), अन्वी (धागा ये टूटे ना, ये धागा), ऋचा (ये ज़िंदगी उसी की है), दियांश (रात कली एक ख़्वाब में आई), चैताली (तुम प्रेम हो, तुम प्रीत हो), कैंसी (इतनी शक्ति हमें देना दाता), महिमा (कहना ही क्या), अक्शा (फेरो ना नज़र से नज़रिया), भाव्या शर्मा (सोलह बरस की बाली उमर), नक्श जैन (सैंयां), आराध्या (आपकी नज़रों ने समझा) तथा तृप्ति (ऐसी लागी लगन) शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया तथा संगीत एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया गया।

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