कुलाना वाले पहाड़ को वृक्षारोपण कर पुनः किया आबाद

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अलवर। पानी पेड़ पर्यावरण के प्रति समर्पित एल पी एस विकास संस्थान व संस्थान के प्रकृति प्रेमी राम भरोस मीणा ने वर्ष 2000 से पुर्व एक घनघोर जंगल से विरान पहाड़ में तब्दील हुए कुलाना वाले हनुमान जी के पहाड़ को वर्ष 2014 -15 में संकल्प लेकर पांच पेड़ों से वृक्षारोपण कार्य प्रारंभ किया, वृक्षारोपण के साथ पहाड़ पर होने वाले खदान ओर कटान को लेकर भी लड़ाई जारी रखने से दस वर्ष बाद पहाड़ कों पुनः जंगल जैसा तैयार किया है। वृक्षारोपण के समय काफी बार डराया धमकाया गया, मारने की धमकियां दी गई, लेकिन प्रकृति प्रेमी अपने संकल्प से पिछे नहीं हटे और आज भी वृक्षारोपण करने में लगे हुए हैं। मीणा का कहना है कि अभी 3.5 हैक्टेयर भूमि पर जंगल खड़ा किया है शेष 3 हैक्टेयर भूमि पर अभी जंगल और खड़ा करना है। पहाड़ पर हजारों पेड़ देख कर हर किसी का मन प्रकृति की रक्षा में जुटे एल पी एस विकास संस्थान के राम भरोस मीणा के योगदान को याद करता है।

  • पहाड़ पर मौजूद थे धोक के पेड़ –
    कुलाना वाले हनुमान जी का मंदिर महाभारत काल के समकालीन माना जाता रहा है, यहां कुलाना – मुलाना नामक शहर कभी आबाद था, ग्रामीण बुजुर्ग बताते हैं कि यहां पहाड़ पर धोक के पेड़ बहुतायत में थे, 1962 – 63 में हनुमान जी का गुम्बद निर्माण के लिए चुना तैयार करने बाबत भट्टी जलाई गई थी, जिसमें काफी धोखों को काट कर जलाया गया था, उसके बाद शेष पेड़ों को ग्रामीणों द्वारा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए काटने पर वर्ष 2000 तक नग्न बना दिया गया था। एक घनघोर जंगल जहां सभी वन्य जीव निवास करते, उजाड़ दिया गया।
  • नष्ट हुए जंगल को विरोध झेल कर भी किया आबाद –
    कुलाना वाले हनुमान जी के पहाड़ पर 2014-15 में पहली बार ग्रामीणों के साथ पीपल बरगद बील के पांच पेड़ लगा कर पहाड़ को पुनः जंगल में बदलने का संकल्प प्रकृति प्रेमी राम भरोस मीणा ने लिया था। मीणा प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋतु में बीजों का छिड़काव, सोलिंग, वृक्षारोपण करते रहे हैं, आज पहाड़ पर लगभग तीन हैक्टेयर भूमि पर 6000 से 7000 हज़ार पेड़ एक से दस फुट लम्बे मोजुद है।
  • पहाड़ की तासीर कों समझ किया बीजों का छिड़काव –
    प्रकृति प्रेमी द्वारा नीम, पापड़, रोज़, खैरी, रूंगटा के बीजों का छिड़काव नियमित रूप से किया गया, वर्ष 2018 – 19 में वन विभाग से रेंजर श्योराम गुर्जर ने आग्रह पर पहाड़ी का अवलोकन किया और दुधी ( खैरनी ) के बीजों के छिड़काव के लिए निर्देशित किया, पांच किलो बीज भी उपलब्ध कराएं, बदोलत अकेले खैरनी के पाच हजार पेड़ तैयार हो गए।
  • जैसा मैंने पिछले पांच साल के मेरे कार्यकाल में एल पी एस विकास संस्थान के प्रकृति प्रेमी राम भरोस मीणा द्वारा ग्रामपंचायत गुवाडा भोपाला तथा कुलाना वाले हनुमान जी के पहाड़ पर जंगल तैयार किया, मेरी आंखों देखा है, एक अकेले पहाड़ पर 7000 पेड़ तैयार किए हैं। मैं इनके कार्यों, प्रकृति के प्रति समर्पण, पानी पेड़ के कार्यों के लिए इनकी प्रशंसा करता हूं।
    पुर्व सरपंच एवं ग्राम पंचायत प्रशासक – जगदीश नारायण मीणा
  • पानी पेड़ पर्यावरण तीनों को समझना बहुत जरूरी है, इनके बगैर हमारी धरती और धरती पर रहने वाले सभी जीव, जन्तु, वनस्पतियां जीवित सुरक्षित नहीं रह सकते, इनके लिए काम करना व्यक्ति का पहला धर्म है, हम नग्न पहाड़ों विरान भूमि को हरि – भरी बना कर अपना मानव धर्म निभा रहे हैं।
    प्रकृति प्रेमी एवं पर्यावरणविद् राम भरोस मीणा – एल पी एस विकास संस्थान

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