
लेखक : रमेश जोशी (व्यंग्यकार)
प्रधान सम्पादक, ‘विश्वा’, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, यू.एस.ए.
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प्रिय वीजिनाथन कामकोटि,
खुश रहो। वैसे आपका फ़ोटो देखा तो लगा आपको खुश रहने के लिए किसी आशीर्वाद की जरूरत नहीं है। आप स्वभाव से ही सहज खुश, प्रसन्न रहने वाले आनंदी व्यक्ति लगे। हम जीवन भर अध्यापक रहे और अब भी कोई 75 साल तक का व्यक्ति हमारे सामने पड़ता है तो हम उम्र का फायदा उठाते हुए उसे अपना शिष्यतुल्य मानकर उस पर लद जाते हैं ।
आयु के हिसाब से आप हमारे सबसे छोटे बेटे से भी एक साल छोटे हैं। उसने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया था। उसके बाद मास्टर्स करने के लिए अमेरिका चला गया । उन दिनों आईआईटी से स्नातक होने वालों को फटाफट स्कॉलरशिप या नौकरी मिल जाती थी इसलिए वे आईआईटी से एमटेक नहीं करते थे। आज भी आईआईटी से एमटेक करने वाले अन्य संस्थानों के स्नातक ही अधिक होते हैं। टीचिंग में तो आईआईटी वाले आज भी कम ही जाते हैं। अच्छा है आप टीचिंग में आ गए। जब प्रतिभाशाली लोग टीचिंग में आएंगे तभी तो शिक्षा का स्तर सुधरेगा। अन्यथा तो शिक्षा का वही हाल होगा जो इंटर पास या नकली डिग्री वालों के मंत्री बन जाने से होता है।
हम आपको पहले नहीं जानते थे। हम तो 50 साल पहले ओबामा, ट्रम्प, मोदी जी, शाह, अनुराग ठाकुर, स्मृति ईरानी आदि को भी नहीं जानते थे। अब पेपर लीक के बाद आपको इस लीकेज रोकने वाली कमेटी में रखा गया और प्रियंका गांधी ने आपका नाम लिए बिना कहा इस कमेटी में एक गौ मूत्र विशेषज्ञ भी है तो आप चर्चा में आ गए। संस्कारी शिक्षाविदों लगा कि इस प्रकार प्रियंका एक विद्वान का अपमान कर रही हैं तो उन्होंने एक पत्र लिख डाला। वैसे इन संस्कारी विद्वानों की आत्मा जब 50 लाख की गर्ल फ्रेंड, कटुआ, मुल्ला, जर्सी गाय आदि कहा गया तब नहीं कुलबुलाई।
वैसे आप कंप्यूटर के आदमी हैं। उच्च पद पर है, कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हैं। निशिकान्त दुबे, अनुराग ठाकुर, स्मृति ईरानी, विधूडी आदि केवल एक काम ‘गाली निकालने’ के बल पर सांसद बन सकते हैं तो आप तो काम कोटि हैं मतलब करोड़ों काम के हैं। वैसे यदि आप केवल मल मूत्र के विशेषज्ञ ही होते तो भी हमारी दृष्टि में आप कम महत्वपूर्ण नहीं होते। और फिर गौ मूत्र ! ‘गौ मूत्र विशेषज्ञ’ कहने पर पार्टी के एजेंडे के तहत प्रियंका को घेरने के लिए मुद्दा बनाने वाले कमअक्ल लोग नहीं जानते मल-मूत्र की महिमा।
आज हम सोचते हैं कि मल मूत्र और वह भी राष्ट्र माता का! अलौकिक, पवित्र!! मल-मूत्र किसी का भी हो वह उसके शरीर का सार तत्व होता है। शरीर भोजन-पानी के सभी तत्वों का अवशोषण नहीं कर सकता और वे पर्याप्त मात्रा में मल मूत्र के साथ निकल जाते हैं। चिकित्सक मल मूत्र की जाँच से बहुत सी बातों का अनुमान लगाते हैं। आजकल तो सुना है कि दुनिया के बड़े बड़े नेता अपना मल मूत्र भी किसी अन्य देश में नहीं गिराते। अपने मोबाइल टॉइलेट में सही सलामत संचित करके अपनी मातृभूमि में ले जाते हैं। मोदी जी दुनिया के सबसे बड़े नेता हैं लेकिन वे अपने मल मूत्र के साथ क्या व्यवहार करते हैं, पता नहीं।
पेट ही तंदुरुस्ती और बीमारी का प्रमुख कारण है। अगर पेट ठीक है तो सब ठीक है। और पेट ठीक होने का प्रमाण है कि मल मूत्र का त्याग समुचित हो। मतलब न ज्यादा और न कम । कब्ज और दो से अधिक बार दस्त बीमारी ही माने जाते हैं। दस्त के बारे में कहते हैं- एक बार योगी, दो बार भोगी, तीन बार रोगी। और अगर कोई पेपर की तरह जब चाहे लीक हो जाए तो फिर व राष्ट्रीय समस्या बन जाती है । अब लीकेज के इस मामले में आपका शामिल होना कम महत्वपूर्ण नहीं है । आप गौ मूत्र विशेषज्ञ हैं । हम सब जानते हैं कि सभी का कभी न कभी सबके अपने बचपन में, जागृति या स्वप्न में लीकेज जरूर हुआ होगा । यह संकट कोई बायोलॉजीकल या नॉन बायोलॉजीकल नहीं देखता। संसद या सड़क भी नहीं। कहीं भी, किसी को भी हो सकता है। सोचिये अगर हनुमान को संजीवनी बूटी लाते समय या अर्जुन को स्वयंवर में तेल के पात्र में देखकर मछली की आँख बेधते समय ऐसा लीकेज हो जाता!
मल मूत्र सनातन हैं। जैसे समुद्र और सृष्टि। कहते हैं पहले असुर देवताओं पर आक्रमण करके समुद्र में जा छुपते थे और देवता उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाते । इस समस्या को सुलझाने के लिए अगस्त्य ऋषि ने तीन चुल्लू में समुद्र को पी लिया। देवताओं ने असुरों को निकालकर बदला ले लिया लेकिन अगस्त्य जी ज्यादा देर तक समुद्र को झेल नहीं पाए और उनका समुद्र लीक हो गया । और चूंकि लीक हुआ ऐसा तरल पदार्थ नमकीन होता है सो समुद्र अब तक नमकीन है । अगस्त्य जी के उसी पेशाब से सभी चौदह रत्न निकले, शराब, अमृत, पारिजात, लक्ष्मी, कामधेनु, कल्पवृक्ष आदि । समुद्र के आसपास खनिज तेल निकलता है, समुद्र से ही मोती निकलते हैं, समुद्र से मछलियाँ मिलती हैं ।अगस्त्यजी का यह लीकेज कितना महत्वपूर्ण है ।
इस प्रकार जिसने मूत्र अर्थात समुद्र को समझ लिया उसने सृष्टि और स्रष्टा सबके रहस्य को समझ लिया । अगर कभी पेशाब बंद हो जाए तो पता चलेगा कि मूत्र विशेषज्ञ का क्या महत्व होता है ।
मूत्र ऊर्जा का भी अक्षय स्रोत है जैसे पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा । कहते हैं महान लोगों के पेशाब में चिराग जलते हैं । रोज पेशाब अपना पेशाब इकट्ठा करो और ऊर्जा बनाओ। आत्मनिर्भर भारत ।
1977 में जनसंघ ने सत्ता में घुसने के लिए सभी इंदिरा विरोधी दलों के साथ कंधे पर हल रखकर ‘जनता पार्टी’ बना ली ।अब अपने बल पर सत्ता में आने पर हल और हलधर को उतारकर फेंक दिया । उस समय के प्रधानमंत्री मोरारजी भाई शिवाम्बु अर्थात अपने पेशाब का सेवन करते थे । वे इसे औषधीय प्रयोग मानते थे । मोरार जी की निगाह में आने के लिए चरण सिंह, देवीलाल, राज नारायण, जार्ज फर्नांडीज आदि ने भी इस आत्मनिर्भर भारत का अनुसरण करने की बात कही । अगर आज ऐसी स्थिति होती तो कल्पना कीजिए । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्व मूत्र पान दिवस घोषित हो जाता । राष्ट्रीय मूत्र शोध संस्थान स्थापित हो गया होता । भक्तों के मूत्र पान करते हुए फ़ोटो प्रसारित होते ।
अब आपको इस मामले में किसी तरह की कमतरी का अहसास नहीं होना चाहिए ।
गर्व से कहो हम … ।
(लेखक के अपने विचार हैं)