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मुंबई। स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक का इस्तेमाल अब केवल नए फीचर्स या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तक सीमित नहीं रह गया है। किसी भी नई तकनीक का असली फायदा इस बात से तय होना चाहिए कि वह मरीजों के इलाज में कितना सुधार लाती है, डॉक्टरों के काम को कितना आसान बनाती है और उन पर उनका कितना भरोसा कायम करती है। यह जानकारी एएसजी आई हॉस्पिटल के एमडी एवं ग्रुप सीईओ, डॉ. अरुण सिंहवी ने दी। डॉ. अरुण सिंहवी ने आगे बताया कि डिजिटल तकनीक को सबसे पहले अपनाने वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं भी शामिल रही हैं। शुरुआत कागजी रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने और अस्पतालों के प्रशासनिक कामकाज के लिए सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से हुई। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड, लैब इंटीग्रेशन और टेलीमेडिसिन जैसे टूल्स तेजी से स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बन गए। असल चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि उस पर भरोसा और उसका सही इस्तेमाल है। जैसे ईसीजी से दिल की धड़कन की गड़बड़ी (एरिदमिया) पहचानना, मरीज के वाइटल्स से सेप्सिस का अंदेशा लगाना, या सीने के एक्स-रे में टीबी के लक्षण ढूंढना, ऐसी तकनीकें विज्ञान की कसौटी पर पहले ही खरी उतर चुकी हैं।