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जयपुर। भाजपा सरकार में मंत्रियों की क्या हैसियत है, यह अलवर की तस्वीर ने पूरी तरह उजागर कर दिया है। सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र तक नहीं मिले, और वन मंत्री संजय शर्मा को अपनी ही सरकार के नगर निगम के सामने धरने पर बैठना पड़ा। एक कैबिनेट मंत्री को अपनी ही सरकार में जायज काम के लिए सड़क पर उतरना पड़े, सरकार का इससे बड़ा निकम्मापन और क्या होगा?
जिला कलेक्टर से बात की, फिर भी अफसरशाही ने मंत्री की एक नहीं सुनी। साफ है कि भाजपा राज में सरकार अफसरों के इशारे पर चलती है, मंत्री सिर्फ रबर स्टैंप बनकर रह गए हैं। जब कैबिनेट मंत्री ही व्यवस्था के आगे बेबस है, तो गरीब सफाई कर्मचारी और आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा?
यह भाजपा सरकार की सबसे बड़ी शर्मिंदगी है, अपनी ही सरकार में अपने ही मंत्री को धरना देना पड़े। यह सुशासन नहीं, यह प्रशासनिक तंत्र के पूरी तरह भ्रष्ट और बेलगाम हो जाने की खुली स्वीकारोक्ति है। भाजपा सरकार को शर्म आनी चाहिए।
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