
लेखक : सूफ़ी ताहिर अली शाह (लल्लू बाबा) नक्शबंदी अबुल उलाई
जयपुर राजस्थान? 088248 29921
www.daylifenews.in
दोस्तों नश्वर मनुष्य के जीवन जीने व ईश्वर को महसूस करने मृत्यु को प्राप्त होने तक हमने क्या सीखा है कभी विचार किया है… तो आईए इस पर ही चर्चा करते हैं ईश्वर ने दुनियाँ क्यों बनाई है और ईश्वर को दुनियाँ बनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
दोस्तों वैसे तो ईश्वर ने पहले भी संसार बना कर बसाया था मगर उस दौर में पैसे का चलन नहीं था उस समय काम के बदले काम होता था? जैसे बुनकर कपड़े बुनता था, दर्जी सिलाई करता था, तेली तेल निकाल कर बेचता था? इसी तरह किसान खेती कर अनाज उगा कर अनाज बेचते थे, कुम्हार मिट्टी के बर्तन बना कर बेचते थे इसी तरह दुनिया के आपस में काम चलते थे और लोग ईमानदार होते थे लेकिन ईश्वर को मज़ा नहीं आया? तब ईश्वर ने पैसे बनाने की योजना बनाई उसके बाद लोगों ने पैसे देकर अपनी जरूरत की चीज़ें खरीदना शुरू किया, तब से ही कुछ लोभी मनुष्यों ने पैसे जमा कर लोगों को पर हुकूमत करना शुरू किया?
धीरे धीरे ही धरती पर मनुष्यों का कब्जा होकर गाँव शहर और देश बनते गए बॉर्डर खिंचते गए लोग ईश्वर को भूल कर पैसों को सब कुछ समझ ने लगे तो ईश्वर ने मृत्यु लोक में स्वर्ग- नर्क में जाने के रास्ते बनाएं कर्मों के हिसाब से लोगों को वहाँ भेजने का प्लान तैयार किया गया? जब मनुष्य दुनिया में आता है तो ईश्वर माता पिता के रूप में मनुष्यों का पालन पोषण करता है? जब तक बच्चा छोटा होता है तब तक वो माता पिता के रूप में ईश्वर के सानिध्य में रहता है और जैसे ही कुछ बड़ा होकर मनुष्य अपने फैसले खुद लेने लगता है ईश्वर उसके ऊपर से दया दृष्टि उठा लेता है? यहीं से मनुष्य पे अच्छे बुरे कर्मों का प्रभाव पड़ने लगता है और यहीं से मनुष्य पर ईश्वर की दया- कृपा का असर पड़ना शुरू होता है, जिसे हम नसीब तकदीर व मुकद्दर समझते हैं? लेकिन क्या हम ईश्वर को समझ पाए क्या हम अपने आप को समझ पाए हरगिज़ नहीं? तो हम ईश्वर भक्त कैसे हुए हम तो पहले से ही दूसरे पर आश्रित थे और आश्रित रहने के आदी हो गए फिर ईश्वर हमारी प्रार्थना क्यों सुनें जब हम ईश्वर की नहीं सुनते हैं?
हम ईश्वर की प्रजा पर दया करेंगे तो ईश्वर हमपर दया करेगा और हम ईश्वर की प्रजा की मदद करेंगे तो ईश्वर हमारी मदद करेगा यानि ईश्वर से हम व्यापार कर रहे हैं,ईश्वर हमें कभी घाटा नहीं होने देगा? ऐसा हमें ईश्वर का आभारी होना चाहिए ताकि हमें मौक्ष प्राप्त हो व उसकी असीम उदारता ओर दया दृष्टि के पात्र बने रहें, लाभ उठाने के हकदार बने रहें एक दिन लौट कर ईश्वर की तरफ ही जाना है?
ये दुनियाँ नहीं जागीर किसी की सब है चोकीदार
कुछ तो आ कर चले गए हैं कुछ जाने को तैयार।
ये दुनियाँ अगर परमानेंट होती तो ईश्वर द्वारा भेजे हुए अवतार पीर पैगम्बर इसी दुनियाँ में रहते उन्हें दुनियाँ त्यागने की जरूरत ही नहीं होती क्योंकि इस नश्वर संसार में ईश्वर के सिवा कोई अजर व अमर नहीं है? इसलिए मृत्यु लोक में जन्मे प्राणी को घमण्ड शोभा नहीं देता है सिर्फ ईश्वर को ही शोभा देता है वही अजर अमर है? ईश्वर ने हमें समझाने के लिए धार्मिक पुस्तकों के साथ शायर (कवि) और विदवान लोगों, साधु सन्तों को को भेजा जिसमें कुछ साधु सन्त अपनी नफ्स(इन्द्रियों)के पुजारी हो गये कुछ जिन्दा रहते हुए ईश्वर की गरीब प्रजा की निष्पक्ष निस्वार्थ सेवा करते हुए ईश्वर को प्राप्त हो गये उनकी प्रार्थना से ही ईश्वर गरीब प्रजा के कष्ट दूर करता है?
ईश्वर समस्त मानवजाति पे दया दृष्टि बनाए रखे, हमारे देश में प्रेम भाव, सुख चैन शान्ति, सदभाव, संभाव बनाए रखे, हमारे देशवासियों पर असीम कृपा दृष्टि, भाईचारा, एकता और अखण्डता बनाए रखे? इसी शुभ कामना के साथ आप सब का शुभचिंतक? (लेखक के अपने विचार हैं।)